पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले दोनो को नहीं मालूम कि पढ़ने-पढ़ाने का उद्देश्य क्या है?

मणिप्रकाश तिवारी :

दोस्तों! आपको एक बात बताता हूँ; अपने देश के IIT मुंबई, दिल्ली और गुवाहाटी में एक डिपार्टमेंट है “रूरल डेवलपमेंट”; जहाँ रूरल डेवलपमेंट में Ph-D और अन्य पाठ्यक्रम भी संचालित किये जाते हैं। इस फिल्ड में भी पढ़ाई करके, डिग्री लेकर लोग US, UK चले जाते हैं। अपनी शिक्षा व्यवस्था बहुत गज़ब की है? जिसमे प्राइमरी विद्यालय से लेकर IIT तक न तो पढ़ने वाले को पता है वह क्यों पढ़ रहा है और न ही पढ़ाने वाले को पता है कि पढ़ाने का उद्देश्य क्या है? अपने भारत में युवाओं के बेरोजगार होने का सबसे बड़ा कारण यही है कि जहाँ एक ओर हम इतिहास से सीखने के बजाए इतिहास को सीखते हैं वहीँ दूसरी ओर प्रकृति की घटना को देख उससे विज्ञान सीखने के बजाए पहले विज्ञान सीखते हैं और फिर प्रकृति की घटना का अनुभव करते हैं। तभी तो गणित एवं विज्ञान के छात्र ही नहीं कॉलेज तक के शिक्षक भी यहाँ 9th ,10th तक की प्रयोगशालाओं के उपकरणों को पहचान नहीं पाते हैं। उन्हें यह तक नहीं पता होता है कि शिक्षार्थी जो सवाल कर रहा है या पढ़ रहा है उसका प्रयोग होता कहाँ है?

यहाँ सभी प्राइमरी विद्यालय वह संस्थान बन गये हैं जहाँ भोजन के साथ-साथ थोड़ी पढ़ाई भी करा दी जाती है। कॉलेज की परीक्षा और पढ़ाई; 100 पेज वाले गेस पेपर तक सिमट गयी है। जिसका नतीजा है कि फिजिक्स में मास्टर्स करने वाला यह नहीं जानता कि विद्युत-धारा सदिश है या अदिश! अर्थशास्त्र का ग्रेजुएट माइक्रो और मैक्रो इकॉनोमी में अंतर नहीं जानता। हिंदी में परास्नातक करने वाला रश्मिरथी का नाम पहली बार मेरे मुंह से सुनता है। समाजशास्त्र का ग्रेजुएट कार्ल मार्क्स पर दो शब्द नहीं बोल पाता। इतना होने के बावुजूद ये सभी ग्रेजुएट, मास्टर्स और पी-एच०डी-धारी और हम सब कहते हैं कि भारत में बेरोजगारी है?

अगर ईमानदारी से हम सब सोचे कि जो डिग्री हमे मिली है क्या हम उसके लायक हैं, तो हमे लगेगा भारत में बेरोजगारी है ही नहीं; हम रोजगार के लायक नहीं है।

सबसे बुरी स्थिति तो तब आ जाती है जब वो इन्सान जिसे जीवन में कुछ नहीं मिला और जो कुछ नहीं कर सका वह शिक्षण का कार्य करने लगता है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोग को अँधेरे में ढकेलता है। जैसे बिना मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इण्डिया की इजाजत के कोई भी व्यक्ति प्राइवेट या सरकारी मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर सकता वैसे ही शिक्षा के क्षेत्र में भी प्राइवेट और सरकारी दोनों टीचिंग के लिए नियम होने चाहिए, जिसमे थोड़ी भी कमी पाए जाने पर या शिक्षणकार्य में अनियमितता पाए जाने पर शिक्षक का लाइसेंस कैंसिल किया जाने का प्रविधान हो