विद्युतीकरण के बाद भी बर्रा घूमन के ग्राम गम्भीरपुर के ग्रामीण विद्युत आपूर्ति से वंचित

*कछौना(हरदोई):* विद्युतीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। सरकार द्वारा युद्ध स्तर से विद्युतीकरण के लिए कार्य कराने के बावजूद विकासखंड कछौना की ग्राम सभा बर्रा घूमन के ग्राम गम्भीर पुर के ग्रामीण विद्युत आपूर्ति से वंचित है। 17 वर्षों से कागजों पर विद्युत आपूर्ति चल रही है। 17 वर्ष पूर्व में यह ग्राम अंबेडकर योजना के तहत विद्युतीकरण का कार्य कराया गया था। गांव में सभी कार्य पूर्ण हो गया था। गांव में विद्युत आपूर्ति चालू होने से गांव में खुशी की लहर दौड़ गयी। गांव का ट्रांसफार्मर खराब हो गया। ग्रामीणों ने लाइनमैन को सुविधा शुल्क न देने की सजा ऐसी मिली, कि ग्रामीण डेढ़ दशक से अंधेरे में जीने को विवश हैं। जबकि सरकार हर गांव, हर खेत, हर व्यक्ति को बिजली उपलब्ध कराने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है।

बताते चलें विकास खंड कछौना की ग्राम सभा बर्रा घूमन का ग्राम गंभीरपुर दलित बाहुल्य है। गांव की आबादी मात्र 500 है। यह गांव में 17 वर्ष पूर्व अंबेडकर योजना के तहत विद्युतीकरण के लिए चयनित किया गया था। गांव में खम्भे व विद्युत तार का कार्य पूर्ण हो गया था। गांव में विद्युत आपूर्ति चालू हो गई थी। ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन यह खुशी दो माह बाद काफूर हो गई।
लाइनमैन राजू व चन्द्र पाल ने ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए सुविधा शुल्क की मांग की। परन्तु ग्रामीणों ने जिसका विरोध किया। जिसकी ग्रामीणों को कीमत चुकानी पड़ी। वह लाइन मैनों द्वारा ट्रांसफार्मर ही गायब कर दिया गया। ग्रामीण डेढ़ दशक से अंधेरे में जीने को विवश है। लगातार विद्युत उपकेंद्र से जिला प्रशासन की चौखट पर दौड़ रहे हैं। शिकायत संख्या 1912 की कारगर नहीं हो रही है। ग्रामीण ओम प्रकाश, अर्जुनलाल, प्रवीण, राधे श्याम, रमेश ने जनसुनवाई के माध्यम से शिकायत की परन्तु समस्या का निराकरण नहीं हो सका। ग्रामीणों ने विधायक राजकुमार अग्रवाल व सांसद अंजू बाला को समस्या से अवगत कराया। जिस पर विधायक ने ग्रामीणों की समस्या का पत्र शासन को भेजा है। वही सांसद ने जिलाधिकारी को कड़े शब्दों में गांव में तत्काल ट्रांसफार्मर रखवाकर विद्युत आपूर्ति चालू कराने का निर्देश दिया।विद्युत आपूर्ति न होने के कारण गांव का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। वह कभी गुस्सा के रूप में धरना प्रदर्शन के रूप में फूट सकता है। ग्रामीणों ने बताया समस्या का निराकरण नहीं हुआ, तब हम सब विद्युत उपकेंद्र के घेराव के लिए बाध्य होंगे।


रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता