सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

मोदी सरकार बचे हुए कार्यकाल में समाज को कहाँ तक ले जाती है ?

कश्मीर में यह अशान्ति का वातावरण तब है जब भाजपा वहाँ की सत्ता में भागीदार है...

आदित्य त्रिपाठी-

उपसंपादक indianvoice24.com 

तीन साल के कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा । लेकिन कश्मीर, पाकिस्तान, बेरोजगारी और विदेशों से काला धन वापस लाने के मुद्दे के साथ ही महंगाई जैसी समस्याओं को लेकर उस पर विफलता के आरोप लगने स्वाभाविक हैं ।  सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सत्ता में आयी भाजपा सरकार अभी तक मिली जुली ही साबित हुई है । भ्रष्टाचार के मामले को छोड़ यह सरकार भी पूर्व सरकारों की भाँति ही दीखती है ।

कश्मीर की भयावह स्थिति से शायद ही कोई मुंह मोड़ सके । कश्मीर में यह अशान्ति का वातावरण तब है जब भाजपा वहाँ की सत्ता में भागीदार है । अवसरवाद की राजनीति की धुर विरोधी भाजपा उसी राह पर जाती दीखती है । पाकिस्तान के मुद्दे पर भी कोई इतनी बड़ी उपलब्धि नहीं हासिल हुई है जिस पर इतराया जा सके । भारत के सैनिकों के शव तब भी क्षत-विक्षत किए गए थे और अब भी हो रहे हैं । आतंकवाद के मामलों में स्थिति जस की तस है । लाखों कुशल युवा नौकरी की बाट जोह रहा है किन्तु सरकार कौशल विकास का खेल खेल रही है । कौशल की उपयोगिता के बिना इसका लाभ क्या ? किसान जब भी बदाल था और आज भी बदहाल ही है । नौकरी पेशा लोगों की जेब लगातार गर्म हो रही है और किसानों की फसल का अवमूल्यन हो रहा है । भाजपा सरकार के पक्ष में हितैषी यह तर्क भी दे सकते हैं कि पिछली सरकारों का बिगाड़ा हुआ माहौल सही करने में वक्त तो लगता है । लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि भारत जैसे बड़े लोकतन्त्र में लोक का लोप हो रहा है । सब्सिडी से आय का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है, वरन् समाज पंगु होता है । समाज को रोजगार के अवसर चाहिए । देखना है कि मोदी सरकार बचे हुए कार्यकाल में समाज को कहाँ तक ले जाती है ?