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‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज का ‘ऑन-लाइन राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद समारोह’ ८ जुलाई को

इधर, कुछ वर्षों से उत्तरप्रदेश में गुण्डा-तत्त्वों का निरंकुश साम्राज्य स्थापित हो चुका है। यही कारण है कि आये-दिन दोषी और निर्दोष लोग की नृशंस हत्या की जा रही है और पुलिस किंकर्त्तव्यविमूढ़ बनी हुई है। दूसरी ओर, ये भी प्रमाण उजागर होते जा रहे हैं कि कथित 'हिस्ट्री हिस्टर' दुर्दान्त अपराधी राजनीतिक और पुलिस-संरक्षण पाकर बेख़ौफ़ सीना तानकर घूम रहे हैं और उत्तरप्रदेश की पुलिस ख़ाली हाथ दिख रही है।

ऐसे में प्रश्न है, 'रामराज' की संकल्पना करनेवाले उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ के राज्य में ऐसे निर्मम अपराधियों से  जनता की रक्षा कैसे हो?

राजनीति और पुलिसतन्त्र का अपराध के साथ जो सम्बन्ध ‘चोली-दामन’-सा दिख रहा है, उसे समाप्त कर, जनसामान्य को भयरहित जीवन जीने के लिए कैसे प्रेरित किया जाये?

बौद्धिक समारोह-आयोजक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के अनुसार, ‘उत्तरप्रदेश के आपराधिक तत्त्वों का बलन्द हौसला कैसे हो पस्त?’ विषय पर ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से आयोजित ‘ऑन-लाइन राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद समारोह’ में देश के प्रखर बुद्धिजीवीवृन्द– कृष्णनारायण पाठक (बंगलुरु), अभिलाष नारायण, डी०के० सिंह (प्रयागराज), गौरव अवस्थी (रायबरेली), डॉ० घनश्याम भारती (सागर), डॉ० संगीता बलवन्त (ग़ाज़ीपुर), डॉ० प्रभात ओझा (नोएडा), अशोक पाण्डेय (बलिया) तथा रामाशीष तिवारी ‘शजर’ (गोंडा) की सहभागिता रहेगी।