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बिहारवासियों के नाम आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की खुली चिट्ठी

आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय


बिहार के काका, चाचा, दादा, भाई लोगन!
राम-राम।

रऊवाँ सभे ख़ूब सोचबिचारि कइ लिहीं। आपना के ‘सुसासन बाबू’ कहेवाला नेतवा केतना चटकोर आ चाल्हाकु बावे। सुरू-सुरू में नितिसवा जब मुखमनतरी बनल रहुए तब ले नीमन-नीमन काम कइले रहे। ओही से ओकरा के ‘सुशासन बाबू’ कहल गइल रहे। बाकिर जइसे-जइसे उ जीतत गउए, ओकर दिमागवा सातवाँ आसमान पर चहुँपे लगुए। अब ओकर असलिका रूपवा सबके समनवाँ आ चुकल बा। नरेनदर मोदियो बिहार में जइहें आ आपनु ‘टम्पो हाई’ करइहें। नरेनदर मोदी सोच तारे कि उनकर पहिलका-लेखा परसिद्धी आ प्रभउवा बनल बावे। इ उनकर खाली मनवाँ के बहम बा; काहें से कि ‘कोरोनवा’ के सुरू-सुरू में जवना तरह से उनकर गुलाम पुलिस आ जिला परसासन के अफसर लोग परदेसवा से लौटत बेरिया बिहारी लोगन पर लाठी चलवले बा आ गरिवले बा, ओकरा के रऊवाँ सभे के भुलाये के नइखे। अब ऊ सबकर बदलवा एके साथे लेबे के बेरा नगीचे आव ता।

नरेनदर मोदी एगो अइसन आदमी के नाँव हवे, जवना के मनवा में रऊवाँ सभे खातिर कवनो मोह, दाया नइखे। जइसे पिछलका छौ साल में जोंकिया-लेखा देसवा के जनता के खूनवाँ चूसत बावे, होही जइसन बिहार में नीतीसवा से खून चुसवा लीही। काँहे से कि बिहार में चहुँपि के नरेनदर मोदी आपन बँहिया झारि-झारि के धरम आ पाकिस्तान-चीन के बात करी। आ आपन सबसे बड़का दुसमन पर्टिया काँगरेस के पाकिसतान, कसमीर आ चीन बताई। रऊवाँ सभे ओकर ‘पुरुस चरितर’ से बचल रहब। पिछलका छौ साल जउन नरेनदर मोदी सोगहग देसवा के खाँड़े-खाँड़े करत आवता, उ कवनो अजगर साँपवा से कम नईखे। खाली नफरत, खाली नफरत का बीया बोअत आवता।

आ एतना समुझि लीहीं, रऊवाँ सभे के तनिको बिछलाइल एतना घाही कइ दीही कि कवनो करम का ना रहब सभ। किसानन के बेरोजगारन के नरेनदर मोदी जवन गति कइले बाड़े, ओसे समुझि लीहीं सभे कि नीतीसवा के बिहार से दूरे रखे के बा। एगो ‘कुकुर’ मुखमनतरी बनि जावे, बाकिर नरेन्दर मोदी आ नीतीसवा के दलिया के सरकार नइखे बनावे के बा। मिठुआ के बतिया में फँसब त समुझि लीहीं कि अगिला पाँचु सलिया तब बिहारी लोग भकोर-भकोर के रोइहें। भारास्टाचारु, महँगाई से पढ़ाई-लीखाई, रोज़गारी सब चौपटि लउकाई।

अबु रऊवाँ सभे के सोचे के बा :– रऊँवा सभे के खाइल-पिअल-आघाइल मुखमनतरी चाहीं कि नवका आ जुग-जामाना के हिसाब से सोचेवाला जवान मुखमनतरी चाहीं।
बिहार के चुनइया अब नगीचावल आवता। धरम आ करम पर थूकेवाला खेला सुरू हो गइल बा। उजरका दाढ़ी बाबा बिहार में आइ के आगि लगइहें; भोगी-जोगी-रोगियो के संगम आ तिरबेनी लउकी।

कोरोना के बेरिया में ना जानु काहाँ-काहाँ से भूलल-भटकल बिहारी परदेसियन के मोदी बाबा आ जोगी चाचा के गुलमिया करेवाला पुलिसवन लठियाई-लठियाई के भगवले रहले। काँखु में दो महीना-चार महीना के छौंड़ा-छौंड़ी के दबवले मेहरारू लोग के जवन दुरगती भइल रहे, ओकरा के भुलाई के अगर नीतीसवा के जीतवलीं सभे त इ सभ रऊवाँ सभै के अरदुवाइ घटाइ दीही आ हाथवा में भीख माँगे खातिर कटोरा थमाई दीही। ईहे नीमन कहाई कि नीतीसवा के बिहार से अइसन बिदाई करे के बा कि मोदी-रोगी-जोगी-भोगी के नीमनि से अँखिया खुलि जाये, काँहे से कि अब ले अन्हराईल बाड़न स। कोरोना के समइया नीतीसवा कहले रहे :– प्रवासी बिहारियों को बिहार-सरकार वापस लाने में असमर्थ है।

एतने ना, होहि आफतिया में नरेनदर मोदियो आपनु हाथवा खाड़ा कइ देले रहे।

रऊवाँ सभे के नीके से जाने के चाहीं कि २०१४ के बरसिया में लोकसभइया के चुनइया में भासड़ करत समय नरेन्दर मोदी अहले रहुए :— बोलो! बिहार के लिए कितना दे दूँ? ….. इतना दे दूँ?….. इतना दे दूँ। आप सभी को याद है, उस पट्ठे ने ‘झरा…..’ भी नहीं दिया। बिहार में बिसविधालय आ ना जानु का-का बनवाये के सपना देखाइ के पराइ चलल। ओकर आ नीतीसवा के दलु मिलि के सरकार बनाइ लिहल। मोदिया के आपनु कहलका याद ना रहल। जइसे खाई के भँइसिया हग देले, होही लेखा ऊहो पाठा बोलि-बालि के भागु निलल आ फेरू बिहार में जलदी ना आइल। मुँहवा में करीखा त पोताइ गईल बा, बाकिर बजरु बेहया लोगन के का कहलु जाउ?

थोरे महीना पहिले बिहार में बाढ़ आइल रहे। ओमे नरेनदर मोदी केतना बार सहायता लेके चहुँपल रहुअन? फेर कवना मुँहवा से ऊ भोटवा माँगे अइहें। रऊवाँ सभे कि चाहीं कि चुपचापे अपना घर में बइठल रहीं। अइसन जतन करीं सभे कि ओइजा खाली कुकुर-बिलारि फेंकरा सँ।

अब रऊँवा सभे खातिर बाड़ा नीक समयवा मिलि गइल बा। अब निरबंसियन आ तिरछोलन के सीखिया सिखावे खातिर चुनइया आवे वाला बा। मनवाँ बना ल़ीं सभे कि एगो गदहा मुखमनतरी भले बने, बाकिर नीतीसवा जरिको ना। आ ना त घर में जेतना सवाँग बाड़े, ओही हिसबवा से अलमुनिया के कटोरा ‘एडभान्स’ में घरे में रखि लीहीं सभे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृ्थ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १७ अक्तूबर, २०२० ईसवी।)

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