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पंडित धर्मशील चतुर्वेदी जी का बीएचयू अस्पताल में निधन

COURTESY : Koushal Mishra (HOD POLITICAL SCIENCE BHU)-

“स्वयं में बनारस” पंडित धर्मशील चतुर्वेदी जी का बीएचयू अस्पताल में निधन हो गया। वे लगभग 80 वर्ष के थे तथा सास लेने की तकलीफ के बाद बीएचयू स्थित अस्पताल में भर्ती थे।काशिकेय के मर्मज्ञ ,कवि,साहित्यकार,पत्रकार, वक्ता,अधिवक्ता धर्मशील चतुर्वेदी के निधन से काशीवासी शोक में डूब गए है।
हर बनारसी के उन्हें अपना दोस्त समझता था। धर्मशील जी के मुह में पान चेहरे पर मुस्कान के थे सब कायल।उन्होंने वाराणसी में अनेक संस्करोतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों की शुरुवात की थी। उनके शव को पियरी स्थित आवास पर अंतिम दर्शन हेतु रखा गया है।वे काशी की संस्कृति ,सभ्यता और परम्परा के निःस्वार्थ वाहक थे।जनवार्ता परिवार के सदस्य के रूप उनका अथवा कालम ,अष्टावक्र स्तम्भ विशेष रूप से लोकप्रिय थे। जनवार्ता परिवार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। संपादक डा राज कुमार सिंह ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है की काशी ने बनारसीपन के प्रतीक धर्मशील को खो दिया। सत सत नमन।जनवार्ता परिवार की विनम्र अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
शव यात्रा कल प्रातः 8 बजे पियरी स्थित आवास से प्रारम्भ होगी।
पं॰ धर्मशील चतुर्वेदी के निधन पर काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र सिंह, महामंत्री डा॰ अत्रि भारद्वाज, कोषाध्यक्ष दीनबन्धु राय, उपाध्यक्ष चन्दन रूपानी, विरेन्द्र श्रीवास्तव, देवकुमार केशरी, मंत्री उमेश गुप्ता, व पुरुषोत्तम चतुर्वेदी, वाराणसी प्रेस क्लब के अध्यक्ष जितेन्द्र श्रीवास्तव, मंत्री रंजीत गुप्ता, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, उपाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी, संयुक्त मंत्री आर॰ संजय, क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार,संजय अस्थाना, कृष्णदेव नारायण राय, बी॰ बी॰ यादव और कार्यकारिणी सदस्यों मनीष चौरसिया, शशि श्रीवास्तव, सुनील शुक्ला, ए॰ के॰ लारी, सियाराम यादव, प्रमिला तिवारी, दिलीप कुमार, राजेन्द्र यादव, अमित शर्मा, अरविन्द कुमार, रमेश सिंह, रोहित चतुर्वेदी सहित अनेक पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें जागरूक पत्रकार, संवेदनशील साहित्यकार और जिम्मेदार अधिवक्ता व जीवंत व्यक्ति की संज्ञा दी। संघ की लगभग सभी गतिविधियों में उनकी सक्रिय सहभागिता होती थी। उन्हें बनारस के इनसाइक्लोपीडिया की संज्ञा देते हुए कहा कि वे अपने अनोखे बनारसी मिजाज के कारण भीड में भी अकेले दिखते थे। महामूर्ख मेला और उलूक महोत्सव के वे नायक थे।