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सरकार ने राज्यसभा में कराया संसदीय परम्परा के साथ सामूहिक बलात्कार!

आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

किसान विधेयक को पारित कराते समय राज्यसभा में अल्प मतवाली न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार ने संसदीय परम्परा के साथ सामूहिक बलात्कार किया है। समय समाप्त हो चुका था। उपसभापति ने मतविभाजन की माँग की उपेक्षा की गयी थी; परन्तु उपसभापति ने उसे स्वीकार नहीं किया और आनन-फानन में विधेयक पारित करा दिया गया था। उपसभापति ने कहा,”डीविज़न नॉट एलाउड।”

आश्चर्य की बात है कि किसान विधेयक की माँग दोनों सदन में जब किसी भी राजनैतिक दल के नेता ने नहीं की थी तब उक्त विधेयक को लाने का औचित्य क्या था?

प्रश्न है, अपराह्न एक बजे का समय हो चुका था। जब सदन का समय समाप्त हो चुका था तब सदनसत्र की कार्यवाही का स्थगन क्यों नहीं कर दिया गया? विपक्ष के नेता ने जब उपसभापति से कहा कि अब समय समाप्त हो चुका है। इस पर कल विचार किया जाये तो उचित रहेगा, फिर उपसभापति ने नियम की उपेक्षा करते हुए, उस विवादास्पद विधेयक को संसदीय परम्परा की हत्या करते हुए क्यों पारित कराया? यदि वह कथित विधेयक का पारित कराना बहुत आवश्यक ही था तो उस पर सदन के सदस्यों की राय लेनी चाहिए थी या फिर दूसरे दिन कृषिमन्त्री का वक्तव्य कराना चाहिए था और उस पर प्रश्न-प्रतिप्रश्न के लिए सम्बन्धित सदस्यों को आमन्त्रित किया जाना चाहिए था; परन्तु खेद है, संसदीय नियमावली की अवहेलना की गयी थी। सदन के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी इच्छा से सदन की कार्यवाही के लिए प्रक्रियाएँ निर्धारित करे। ऐसे में तो राज्यसभा के उस विवादित उपसभापति के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करायी जानी चाहिए।

अब न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार की निरंकुश और स्वेच्छाचारिता की मनोवृत्ति को देखते-समझते तथा अनुभव करते हुए, देश के किसान समग्र क्रान्ति की ओर बढ़ चुके हैं। इतना ही नहीं, कथित तानाशाह सरकार को गठित करानेवाले अधिकतर सहयोगी दलों के सदस्यों ने विधेयक को ‘सेलेक्ट कमेटी’ के पास भेजा था; परन्तु ‘सरकारी’ उपसभापति ने सदस्यों की माँग की उपेक्षा की थी। यदि मतविभाजन होता तो सरकार के ही सहयोगी दलों का ही विरोध का सामना करना पड़ता। इस तरह से सरकारी मत अल्पसंख्यक दिख रही थी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २७ सितम्बर, २०२० ईसवी।)

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