सत्ताधारियों! देशवासियों को उत्तर दो।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

भाषाविद् समीक्षक

देश के मतदाताओं ने तुम्हें सत्ता इसलिए नहीं सौंपी है कि अपनी निष्क्रियता का ठीकरा पूर्ववर्ती सत्ताधारियों पर फोड़ते रहो और बेशर्म बनकर अपनी नाकामियाँ छिपाते रहो। वर्ष २०१४ से पहले के सत्ताधारी नकारे थे; अयोग्य थे तथा देश को गर्त में ले जाने के लिए ज़िम्मादार थे, इसीलिए तो तुम्हें अप्रत्याशित बहुमत के साथ मतदाताओं ने सत्ता सौंपी है। ऐसे में, तुम सभी उस अवधि की कमियाँ और अकर्मण्यता को बार-बार क्यों बताते हो? वर्ष २०१४ से अब तक के अपने कारनामों को सामने लाने से क्यों कतराते आ रहे हो? अपनी ज़मीनी हक़ीक़त सामने लाओ, देश का नागरिक जानना चाहता है।

साहस हो तो बताओ : सत्ता में आने से पहले तुमने भरी जनसभा में सीना फुलाकार आस्तीने भाँज-भाँजकर जिस नाटकीय शैली में आश्वासन दिये थे; घोषणाएँ की थीं, उनमें से आज की तारीख़ में कितनी घोषणाएँ और कितने आश्वासन पूरे किये हैं?

‘विकास का मॉडल’, ‘बनारस को क्योटो बनायेंगे’, ‘बुलेट ट्रेन’, ‘स्मार्ट सिटी’, ‘आयुष्मान् भारत’, ‘सौभाग्य योजना’, उज्ज्वला योजना’, ‘नारी-स्वाभिमान की रक्षा करेंगे’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘बालिकाओं की निश्शुल्क शिक्षा’, ‘नमामि गंगे योजना’, ‘किसान-जवान की स्थिति सुधारेंगे’, ‘बेरोज़गारों को करोड़ों की संख्या में रोज़गार देंगे’, ‘एक राष्ट्र-एक कर’, ‘स्वास्थ्य-शिक्षा की सुविधा देंगे’, ‘पेट्रोल-डीजल सस्ता करेंगे’, महँगाई और भ्रष्टाचार दूर करूँगा’, ‘एक के बदले ग्यारह सिर पाकिस्तान से लाऊँगा’, ‘विदेशों से काला धन लाऊँगा’, ‘लोकायुक्त नियुक्त करायेंगे’ आदिक आश्वासन चुनाव जीतने और सरकार बनाने के बाद ‘गधे के सिर से ग़ायब सींग’-जैसे दिख रहे हैं।

हम देशवासियों के ‘करों’ से चलायी जानेवाली सरकार ने हमारे धन का कितना सदुपयोग किया है, इस पर श्वेतपत्र प्रसारित करने की सामर्थ्य सत्ताधारियों में है? देश में ‘बदले की राजनीति’ ‘महँगाई’, ‘भ्रष्टाचार’, ‘आर्थिक अनियमितता’, ‘विकासदर में अभूतपूर्व गिरावट’, ‘भुखमरी’, ‘व्यभिचार’, ‘बलात्कार’, ‘अपहरण’, ‘हत्या’ आदिक जघन्य अपराधों का हिसाब देशवासी माँग रहे हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० अक्तूबर, २०१९ ईसवी)

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