न्‍यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए आगे आने वाले नौजवान सच्‍चे अर्थ में विवेकानंद के विचार के दूत हैं

कर्नाटक के बेलगावी में हो रहे राष्‍ट्रीय युवा दिवस और सर्वधर्म सभा के उद्घाटन कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत के युवा कभी गुमराह नहीं होंगे । जो राष्‍ट्र को बांटने का प्रयास कर रहे हैं उनको वे उचित जवाब दे रहे हैं । युवा, आदर्शों के संदेशवाहक हैं और उन्‍होंने समाज से जातिवाद तथा कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्‍प लिया है। देश जाति के बंधन से मुक्‍त होने की तरफ बढ रहा है। लेकिन कुछ समाज विरोधी लोगों ने अपनी नजर टिका दी है। आज की युवा पीढी उनको जवाब देकर रहेगी और जवाब दे रही है। भारत का नौजवान कुछ मुट्ठी भर लोगों के बहकावे में नहीं आने वाला है। ऐसे नौजवान न्‍यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए सच्‍चे अर्थ में विवेकानंद के विचार के दूत हैं। श्री मोदी ने कहा कि भारत ऐसे अनेक साधु-संतों का देश रहा है, जिन्‍होंने समाज की सेवा की और उसको सुधारा। उन्‍होंने कहा कि ये भारत के युवा ही हैं, जो स्‍वच्‍छ भारत अभियान को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद ने भाईचारे पर जोर दिया था, उनका विश्‍वास था कि लोगों की भलाई भारत के विकास में निहित है। उन्‍होंने कहा कि पश्चिम के देशों में भारत के विरूद्ध काफी प्रचार होता था, जिसे स्‍वामी विवेकानंद ने गलत साबित किया। भारत से एक रूप थे विवेकानंद। आधुनिक जगत के बढते कदमों के साथ कदम मिलाकर चलने का साहस था। उनमें समाज में व्‍याप्‍त विकृतियां छूआछूत, भेदभाव, पाखंड को खण्‍ड-खण्‍ड करने का योद्धा भाव भी था। इसी भाव ने विवेकानंद को एक योद्धा संयासी भी बनाया। मोदी जी ने बताया है कि सामाजिक कार्यकर्ता जो अभागों के उद्धार करने के लिए चेष्‍ठा कर रहे हैं। वे आधुनिक भारत के विवेकानंदा हैं। प्रधानमंत्री जी ने रितु रानी चेन्‍नमा और संगोली रायणा का स्‍मरण किया और कहा कि उन्‍होंने ब्रिटिश के खिलाफ जंग छेडी थी। उन्‍होंने कहा कि जगत ज्‍योति बसावना 12वीं सदी में ही जनतंत्र व्‍यवस्‍था का जोर दिया था और संसद की परिकल्‍पना की थी। प्रधानमंत्री ने युवाओं से 2022 तक न्‍यू इंडिया के निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करने का संकल्‍प लेने को कहा। उन्‍होंने युवाओं से कहा कि अगले कुछ वर्षों में उन्‍हें पांच से दस हजार गांवों को खुले में शौच से मुक्‍त कराने और एलईडी बल्‍बों के उपयोग को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेना चाहिए।

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