पति के मामू ने किया बलात्कार, पीड़िता ने डीजीपी से की शिकायत

आईन: एक-रूप अनेक

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
भले ही चुप है आईन: तेरा,
कब बोल पड़ेगा, नहीं मालूम।
दो–
आईन: को एहतियात से रखना,
टूटा तो सारे राज़ बिखर जायेंगे।
तीन–
तुम हँसते हो, सताते हो और निभाते भी,
सवाल है, टूटते ही बिखर जाते क्यों हो?
चार–
झूठ तो कई बार बोला है आईन:,
बात दीगर है, कोई भाँप नहीं पाया।
पाँच–
आईन: मुझसे अब भी नाराज़ रहता है,
चुप रहने की क़ीमत माँगता रहता है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ जुलाई, २०२० ईसवी)

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