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बोलो जय श्री राम

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
देश कितना पिछड़ गया, दिखते नमकहराम।
गिद्ध दिख रहे हर तरफ़, बोलो जय श्री राम।।
दो–
नारी हर दिन लुट रही, दिखते सब बेकाम।
रावण घर-घर दिख रहे, बोलो जय श्री राम।।
तीन–
महँगाई की मार से, होते लोग तमाम।
भारत भूखा सो रहा, बोलो जय श्री राम।।
चार–
न्यू इण्डिया बहक रहा, भारत हुआ ग़ुलाम।
शातिर-मण्डी सज गयी, बोलो जय श्री राम।।
पाँच–
कितना दिखता बेरहम, कलियुग का है राम।
सीता को है छल गया, बोलो जय श्री राम।
छ:–
जीवन नरक बना रहा, ले विकास का नाम।
भस्मासुर-सम दिख रहा, बोलो जय श्री राम।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ जनवरी, २०२१ ईसवी।)

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