हे राम! देखिए कहाँ… माँ ने जीवित नवजात को फेंका

जीय भोजपुरी-जीय आ फटहन के सीय!

भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं॰ पृथ्वीनाथ पाण्डेय

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

नीमन भा बाउर
खइका के गोड़़ लाग।
बिजुरी के ठेकान ना;
पानी के मारामारी।
हगे के मैदान ना।
सरकार अपना बंसरी में फँसइले बिया
सोचालय (शौचालय) के चारा देके गरई मछरिया।
आ लड़पोछना के पतोहिया
बँसवारी में जाइ के
ठोकतिया फराकी।
सरकार गाँव के
ठेहुन से देखे ले;
एही से–
ओकरा किसनवन से दूरी बा
आ मलाईदार सहर से नजदीकी।
जीय बाबू जीय!
आ निहुर-निहुर
आपनि बुढ़ाई के तू सीय।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज ; २१ अक्तूबर, २०२० ईसवी)

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