प्रभु महावीर स्वामी को समर्पित दोहे

दिव्य लोक की राह में , रश्मि पुंज के मंत्र ।
महावीर क्षण साधना, जीवन भर का तंत्र ।।१

अरिहंतो को नमन है , सिद्धजन नमस्कार !
साधक संतो नमन है, कृपा करो करतार !!२

मंत्र साध सदगुण सधे , रहे न दुख जंजाल ।
शब्द भाव अनुसार ही, अंतस सच खंगाल ।।३

अरिहंती मंगल मिले , साध रहे है सिद्ध ।
माया पंछी लोभ में, डूब रहा तल गिद्ध ।।४

अरिहंत शरण साध ले , मिले ज्ञान नव बोध!
धर्म आत्मज्ञ छाँव में, जीवन गति अवबोध !!५

मंगल भव हो धर्म से , संयम तप पहचान ।
कर्म अहिंसा साध ले , मत बन मद अनजान ।।६

ऊर्जा तप बदले दिशा , भीतर तत्व विशाल ।
माया विकार वासना , भाग रहे बद हाल ।।७

धर्म विज्ञान तन में बसे , विवेक बढ़े प्रमाण ।
सूक्ष्म स्थूल के भेद में, ऊर्जा अनुभव प्राण ।।८

राग द्वेष के मध्य में, अनशन का उन्माद ।
गतिमय जीवन श्वास से ,रुके अनंत प्रमाद ।।९

उणोदरी वृति धीर से, भरो पेट आहार ।
जीवन ऊर्जा योग से, धरो देह भंडार ।।१०

माया के रस त्याग दे , समझो काया क्लेश ।
अंतर रस संलीनता , निखरे ज्योति अशेष ।।११

छगन लाल गर्ग विज्ञ, जीरावल, सिरोही!
राजस्थान ।
दिनांक १७|०४|२०१९

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