ग्रीन दिवाली सबको प्यारी, होय नहीं कोई बीमारी

बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’


जगमग जगमग ज्योति जली है।
दीवाली की धूम मची है।।
दीपोत्सव की रजनी आयी।
दीपों की माला बुन लायी।।

घर में मंगल मूर्ति विराजे।
रिद्धि-सिद्धि भी संग सुसाजे।।
लक्ष्मी – पूजन सभी कराई।
सबमें बँटने लगी मिठाई।।

मृत्तिका निर्मित दिये से है अमावस काँपती

शिशु के हाथों फूलझड़ी है।
चकरी खुश हो नाच रही है।।
जो अनार से निकले तारे।
आसमान में चमके सारे।।

निशा रूप निज निरख रही है।
रँगी चुनरिया ओढ़ रही है।।
रैना दूल्हन बनकर आयी।
फोड़ पटाखे खुशी मनायी।।

असहायों को मान दिलाएं।
निर्धनता को दूर भगाएं।।
उज्ज्वलता प्रति घर में आए।
तिमिर तनिक भी शेष न छाए।।

दूषित कलुषित चारित्रिकता।
नष्ट-भ्रष्ट सी है नैतिकता।।
रश्मि प्रभा से तार जगत दें।
मानव मूल्य स्थापित कर दें।।

भाई-चारे का प्रसार हो।
भेद-भाव से रहित धार हो।।
प्रेम-भाव ही संचारित हों।
रिश्ते नाते निर्वाहित हों।।

ग्रीन दिवाली सबको प्यारी।
होय नहीं कोई बीमारी।।
लक्ष्मी धन भंडार भरेंगी।
शुभम अस्तु कल्याण करेंगी।।


दीपावली के पावन पर्व पर मेरी ओर से आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। माता लक्ष्मी और गणपति आप सभी के जीवन में दिव्य खुशियाँ और सुख समृद्धि प्रदान करें।
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