संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

अंजु चन्द्रामल की अभिव्यक्ति

सुनो!
तुम्हें देने के लिए प्यार नहीं बो रही मैं,
कहीं सींच-सींच कर
पागलपन में सड़ा दिया तो?
मुहब्बत में हिलोरे लेती बेल भी नहीं लगाऊँगी,
कहीं सहारा देने, बाँध-बाँध के टाँकने की
बंदिशों में घुट के ग़र मर गयी ‘मुहब्बत’ तो?
इश्क़ तो बिलकुल नहीं रोपूँगी,
ग़र शक के कीड़े खा गये तो ?
ये प्यार, इश्क़, मुहब्बत
पूरी तरह जी नहीं पाते।
तो सुनो!
मैं ख़ुद में तुम्हें बोती हूँ;
मैं तुम्हें ही सींचती हूँ;
तुमको ही अपने दिल में जगह दे देती हूँ
और तुम्हें ही अपनी भावनाओं का
सहारा दे देती हूँ,
जिससे फैले तुममें प्रेम-बेल
और तुम मुझे उसमें समेट लो।
पूरे जीवन मुझे प्रेम देते रहना

इस तरह मेरी ख़ुद में तुमको
बोने, रोपने और उगाने की
मेहनत सफल कर देना।

अंजु चन्द्रामल, नायब तहसीलदार, बाँसडीह, बलिया।