मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

प्रबल गर्जना कीजिए

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद

भर्त्सना    से  बेहतर  सखे!

प्रबल   गर्जन       कीजिए।
दश    दिशा   में    गूँज   हो,
संघर्ष का नव वर्जन दीजिए।
दुष्टता  की   राहें    रुद्ध  कर,
साधुता को  अर्पण   कीजिए।
ग़र हो   सके तो  मित्र   अब,
दुर्जनता को  तर्पण कीजिए।
सन्मार्ग  का   ही   हो    वरण,
तन – मन   समर्पण  कीजिए।