मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया, सावन आया

है सावन आया, नई उमंगे लाया
भूल कर सारे गिले सिकवे
मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया है
मुरझा गए थे कभी चेहरे
उलझ गए थे कभी वास्ते
खिला कर चेहरे, सुलझा कर वास्ते
सावन कुछ ऐसा झूम कर आया है,
मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया है।
ह्रदय जो चुप सा बैठा है
भीड़ में जो तन्हा है
जो बैठा साहिल पर किनारा ढूंढ रहा है
हृदय को टटोल,
मुग्ध करने वाला रस पिलाया है,
मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया है।
मिटा कर अंधकार
झूलों में मन को झुलाया है,
गांठ पड़ गई थी जिन धागों में
उन धागों को सुलझाया है,
मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया है।

प्रीति मधु शर्मा
लद्दा, घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश