तन्हाई

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’

किसको फिक्र है इस जिन्दगी की ,
हमने तो तूफानों से टकराना सीखा है ।
किसको फिक्र है टपकते आंसुओं की,
हमने तो दरिया से मुस्कुराना सीखा है ।
रूठ जाए जिसको मुझसे रूठना हो ,
हमने तन्हाइयों से मनाना सीखा है ।
मुझे पता है जिंदगी में किस कदर अकेला हूँ,
हमने भी अंधेरे में दीपक जलाना सीखा है।
छोड़ दो मुझे अब तन्हाइयों के आगोश में ,
सबने मुझे धोखा दिया है और रुलाना सीखा है।