सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

याद आते हैं वह दिन

याद आते हैं वह दिन ,
जब हम साथ होते थे।
लड़ते झगड़ते फिर मनाते ,
वो दिन भी क्या खास होते थे।
जो कभी हमें खास समझते हैं,
वह अब अनजान बनकर फिरते हैं।
अब कितनी बातें छुपाते हो ,
जो कभी हर बात बताते थे।
जो देखकर मुस्कुरा दिया करते थे ,
वह आज कल देखते तक नहीं।

संजना, 12वीं कक्षा की छात्रा, राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश