याद हूंँ मैं

तुम भूल गए हो या याद हूंँ मैं
अपनी धुन में खोए हुए रहते हो ,
मन में आस लिए , तेरी राह में ,
पलकें बिछाए बैठी रहती हूँ ‌।

कहीं खो गई हूंँ या याद हूंँ मैं
तुम्हारे दिल की बात , अब मुझ तक नहीं पहुंँचती ,
न फोन , न मैसेज , इंटरनेट के दौर में भी ,
हम बेगाने से लगते हैं ,
बीते पल को याद करके दिल से लगा कर बैठी हूंँ।

तुम भूल गए हो या याद हूंँ मैं
आपाधापी में रहते हो ,
खाई थी हमने कसमें, जीवन के सफर में साथ मिलकर चलेंगे ,
टूटी हुई यादों के सहारे, आज भी
ज़िंदा हूंँ मैं
तुम भूल गए हो या याद हूंँ मैं।

चेतनाप्रकाश चितेरी, प्रयागराज , उत्तर प्रदेश ।