राजेश पुरोहित की कविताएं

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी


1. दो कुलों में उजियारा करती बेटियां

अपनी सुरक्षा भी खुद करने लगी है बेटियाँ।
ये सच है कि अब तो बोलने लगी है बेटियाँ।।

इनके साहस को कम न समझो तुम दोस्तों।
झांसी की रानी सी ये बनने लगी है बेटियाँ।।

जमाने की चाल को बखूबी समझने ये लगी।
चरित्रहीनों को सबक सिखाने लगी बेटियाँ।।

बेटों से लाख गुणा आगे है हर क्षेत्र में बेटियाँ।
परिवार को अच्छे से संभालने लगी है बेटियाँ।।

बेटा तो एक कुल का ही करता नाम रोशन है।
मगर दो कुलों में उजियारा तो करती है बेटियाँ।।

2. महाशक्ति भारत


करो मेहनत की कमाई सब मेरे भाई।
गीता ज्ञान सिखाती करके सीखो भाई।।

गाँधी ने गीता ज्ञान की अलख जगाई।
सत्याग्रह कर हमको आज़ादी दिलाई।।

वैज्ञानिक सोच विकसित करो भाई।
अंधश्रद्धा में तनिक न उलझो भाई।।

जादू टोना टोटका सभी बेकार हैं भाई।
सबसे सुन्दर कर्म करो मिले सुख भाई।।

गंगा जमुना सरस्वती का देश है भाई।
सागर जिसके नित चरण पखारे भाई।।

हिमगिरि किरीट मनोहर लगता भाई।
कश्मीर सा स्वर्ग हमारा सुन्दर है भाई।।

केसर की खुशबू से महके वादी है भाई।
ऐसे सुन्दर देश की महिमा गाऊं मैं भाई।।

देशभाव जगा मन मे आगे बढ़ो भाई।
फिर से भारत महाशक्ति बनाओ भाई।।

सबका साथ , सबका प्रयास हो भाई।
देश विकास की बात तभी सच हो भाई।।

राम कृष्ण गौतम महावीर का देश है भाई।
ऋषि मुनियों ने जिसकी महिमा है गाई।।

3. प्यार के खत


विरह की अग्नि में हम दहकते जा रहे हैं।
पल पल गुजरता युगों सा सहते जा रहे हैं।।

रात भी लंबी लगने लगी कब खत्म होगी।
कब उगेगा भोर का सूरज कहते जा रहे हैं।।

यादों की बारात में हम खूब नाचे खवाबों में।
सच जानते हुए भी यादों में बहते जा रहे हैं।।

वो पीपल की छाँव में उनके संग बतियाना।
हाथों में हाथों लेकर आगे बढ़ते जा रहे हैं।।

प्यार के खत जो पुरानी डायरी में मौजूद हैं।
सूखे गुलाब भी यूँ ही सभी महकते जा रहे हैं।।

बैरन काली बदली अब न बरसो तुम यूँ ही।
तन्हाई में हम अकेले तन्हा जलते जा रहे हैं।।

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