ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

शहरों में बिक रहा ज़ह्र, सरकार की अहम भूमिका

एक तरफ सरकार नशा मुक्त भारत का दिखावा करता है वहीं दूसरी तरफ नशा रूपी ज़हर को बेचने के लिए लाखों रूपए लेकर लाइसेंस देकर नशे को वैध बनवाकर बेंचने को प्रेरित भी कर रहा है ।

हाल ही में ‘सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय’ (Ministry of Social Justice and Empowerment) द्वारा ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के अवसर पर देश के 272 ज़िलों के लिये एक नशीली दवा-रोधी कार्य योजना/’नशा मुक्त भारत’ (Drug-Free India Campaign) अभियान की शुरुआत की गई है । हमारे समाज में यह धीमा ज़हर कई रूपों में अपनी पैठ बनाए हुए है । उदाहरण के लिए गुटखा, पान मसाला, अंग्रेजी शराब, देशी शराब, सिगरेट, बीड़ी, भांग आदिक । ये सभी तो वह नशा रूपी ज़हर के वह प्रकार हैं जिसका सरकार ने लाइसेंस दे रखा है । जिसको नशे के व्यापारी बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाकर खुलेआम बेंच रहे हैं । जिसमें खुले तौर लिख देते है सरकारी अंग्रेजी शराब की दुकान, सरकारी देसी शराब की दुकान, सरकारी भांग का ठेका आदिक । इससे तो साफ जाहिर होता है कि सरकार द्वारा नशा मुक्त भारत का सपना एक छलावा मात्र है।

नशा मुक्त भारत अभियान वर्ष 2020-21 के लिये देश के 272 ज़िलों में शुरू किया गया है । यह अभियान न केवल संस्थागत सहयोग पर, बल्कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान के लिये पहचाने गए ज़िलों में सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों  (community outreach programmes) पर भी ध्यान केंद्रित करेगा । इस अभियान के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नशा मुक्ति में कार्यरत संस्थानों के लिये धन जुटाने तथा युवाओं के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिये स्कूलों और कॉलेजों में नशा मुक्ति अभियान को संचालित करेगा । 

लेकिन हमारे यहाँ शायद ही कोई ऐसी सड़क हो जहाँ छोटी छोटी दुकानों में पान मसाला, तंबाकू के उत्पाद न बिक रहें हो । एक समय शहरों में गुटखा की बिक्री बहुत तेज़ी से हो रही थी । फिर सरकार ने उसको बंद करवा दिया । लेकिन व्यापारियों ने उसको पान मसाला लिख कर बेचना शुरू कर दिया । फिर हुई सिगरेट बंदी जो कि सिर्फ बातों और कागजों पर बंद होकर रह गई। कई मीडिया चैनलों ने भी यह खबर बहुत उछल-उछल कर चलाई । लेकिन वक्त के साथ-साथ सरकार ने दूसरे मुद्दों की तरफ आम जनता का ध्यान आकर्षित कर उलझा दिया । लोगों ने इन सब बातों को इस लिए भी भुला दिया की आम जनता का अच्छा खासा प्रतिशत भी बिना नशे के नहीं रह सकता और सरकार भी क्यों मना करे ? जनता को ज़हर देने से सरकार की जेबें भी भर रही हैं । ज़हर बेंच कर राजस्व को भी मजबूत किया जा रहा है । एक ओर सरकार की शय पर नशा बेंचा जा रहा है वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नशे की समस्या का  विस्तार से  मूल्यांकन करने, नशे के आदी व्यक्ति का उपचार  एवं उनका पुनर्वास करने, लोगों में नशे की प्रति जागरुकता सृजित करने के साथ-साथ देशभर में नशा मुक्ति केंद्र चलाने के लिये एनजीओ को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ।

अवनीश मिश्रा

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