‘विकल्प’ पूछनेवाले देश में ‘भिक्षाशाला’ खुलवाने की प्रतीक्षा में हैं

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


अपना देश बिखरता जा रहा है। केन्द्र और राज्य की सरकारें हमारे युवावर्ग के साथ ग़द्दारी करती आ रही हैं और अपने-अपने तरीक़े से देश के संसाधनों को लूटती जा रही हैं। वह दिन अब दूर नहीं, जब देश में जगह-जगह ‘चौकीदार’ नरेन्द्र मोदी और ‘पोस्टर ब्वॉय’ आदित्यनाथ योगी ‘भिक्षाशाला’ का शिलान्यास और उद्घाटन करते नज़र आयेंगे।

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ का चरित्र-चाल-चेहरा’ इतना बीभत्स रहा है कि ‘शोषण’ उनके यहाँ सदा से चाकरी करता रहा है और पलता-बढ़ता रहा है। मैं उन दोनों संस्थाओं में पदाधिकारी था। उनकी स्वार्थपरक नीतियों से विधिवत् परिचित रहा हूँ।
औसत माँ-बाप और अभिभावकगण किसी भी तरह से जोड़-गाँठकर अपनी सन्तानों और पाल्यों को शिक्षित-प्रशिक्षित करा रहे हैं और उक्त संस्थाओं की सरकारें नौकरी के नाम पर अँगूठा दिखा रही हैं और उसके बाद भी उन्हीं युवाओं और उनके माँ-बाप-अभिभावकों में से कई ऐसे हैं, जो नरेन्द्र मोदी और आदित्यनाथ योगी का ‘विकल्प’ निर्लज्जता के साथ पूछ रहे हैं। चिन्ता मत करो, वर्ष २०१९ में नरेन्द्र मोदी नामक घातक चौकीदार यदि फिर से प्रधानमन्त्री बन गया तो जगह-जगह ‘भिक्षाशाला’ खुलवा देगा और ‘भिक्षाप्रशिक्षण-संस्थान’ भी। अपनी औलादों को उसी में डाल देना और एक बार फिर ‘विकल्प’ पूछना।

‘नोटा’ की वकालत करनेवाले अब ‘राजा भइया’ की गोद में बैठकर ‘सोहर’ सुन रहे हैं। सुना है, राजा भइया नयी पार्टी को जन्म देनेवाले हैं और ‘कल’ तक ‘नोटा’ का सक्रिय समर्थन करनेवाले अब दोनों हाथों से ‘सेठउरा’ पकड़ कर खाने के लिए प्रतापगढ़ में टूट रहे हैं। यहाँ भी ‘ठाकुरवाद’ परवान चढ़ रहा है, जो आगे चलकर, एक और ठाकुर ‘आदित्यनाथ योगी’ की गोद में बैठकर ‘जयश्रीराम’ कहता सुना जायेगा। लोकतन्त्र की ख़रीद-फ़रोख़्त कुछ इसी तरह से होता आया है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ११ अक्तूबर, २०१८ ईसवी)

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