थाना अलापुर, बदायूँ के रमनगला में आपराधिक प्रवृत्ति के एक युवक का शव बरामद

देश की ‘सामाजिक समरसता’ को विषाक्त करते ‘नेता’

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

अब समय आ गया है कि देश में एक ऐसा ‘वास्तविक राष्ट्रवादी’ संघटन तैयार हो, जो चुनाव के समय किसी भी राजनीतिक दल के नेता अथवा प्रवक्ता के द्वारा मर्यादारहित कथन करने पर जब उसके दल की ओर से इस प्रकार का स्पष्टीकरण किया जाये– यह तो अमुक व्यक्ति का ‘निजी कथन’ अथवा उसकी ‘निजी राय’ है अथवा उससे ‘पार्टी’ का कोई लेना-देना नहीं है– तब सम्बन्धित दल के प्रमुख नेता को ‘कटघरे’ में ला खड़ा करे; क्योंकि इस चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों के एक ‘अदना’ नेता से लेकर ‘शीर्षस्थ’ नेताओं तक का ‘नंगापन’ और ‘संस्कारविहीन चरित्र’ को बहुत क़रीब से हमने देख लिया है। कैसे किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्त्ताओं और नेताओं को अपने कथनों से उत्तेजित कर, देश के सम्पूर्ण सामाजिक वातावरण को विषाक्त किया जाता है, इसे हमने तीव्रतापूर्वक अनुभव कर लिया है। इससे सिद्ध हो चुका है कि उक्त प्रकार के नेताओं ने अपनी ‘कुण्ठित-लुण्ठित’ मनोवृत्ति का सुस्पष्ट परिचय दे दिया है।

सच तो यह है कि आज देश में एक भी ऐसा राजनेता नहीं है, जिसके पास ‘सहानुभूति’ (सह+अनुभूति) का व्यावहारिक भाव हो। ‘अफ़ीमची’ की तरह से धुत्त होकर किसी भी ‘विचार-विशेष’ को ग्रहण करनेवाला ‘आत्मघाती’ तो होता ही है, ‘समाज’ और ‘राष्ट्रघाती’ भी होता है; क्योंकि उसकी ‘आत्मिक समृद्धि’ मात्र उसके अपने प्रयोजन के लिए ही होती है।

ऐसा नहीं लगता और नहीं दिखता कि देश में कोई भी राजनीतिक दल समग्र राष्ट्र को ‘एक दृष्टि’ से देख रहा हो; एक सिरे से ‘गिरगिटों’ और ‘गिद्धों’ का समूह दिख रहा है, जो ‘लोकतन्त्र’ को ‘मांस के एक लोथड़े’ के रूप में देखते आ रहे हैं।

अब यही उचित समय है, जब इन सभी पर कठोर वैचारिक प्रहार करते हुए, देश में एक ऐसे स्वस्थ बौद्धिक राजनीतिक संघटन का उदय हो, जो धर्म, जाति तथा वर्ग से परे रहकर समाज को स्वस्थ और सर्वकल्याणमय दिशा दे सके।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ मई, २०२० ईसवी)

url and counting visits