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विमर्श : युवा विचारक राम वशिष्ठ का उत्तराखण्ड की पांचों सीटों का सियासी आंकलन

लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना हैं । चुनाव प्रचार इस समय अपने चरम पर है , सभी प्रत्याशी अपने अपने दावों और वादों के साथ मैदान में डटे हुए हैं ।

उत्तराखंड में लोकसभा की पाँच सीटे हैं । पांचों सीटों पर प्रथम चरण में मतदान होना हैं । यहां मुख्य मुकाबला दोनों राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता है । पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की पांचों सीट भाजपा के खाते में गई थी लेकिन इस बार कयास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा को एक या दो सीट का नुकसान उठाना पड सकता है । चुनाव पूर्व किस सीट पर क्या समीकरण बन रहे हैं उसको थोड़ा समझते हैं –

अल्मोड़ा –

अल्मोड़ा सीट राज्य की एकमात्र आरक्षित सीट हैं । यहां से भाजपा ने सीटिंग सांसद अजय टम्टा को ही टिकट दिया है और कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा पर दांव खेला हैं । गौरतलब हैं कि दोनों प्रत्याशी आपस में चचेरे भाई हैं । प्रदीप टम्टा इस सीट से पहले भी जब केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी तब सांसद रह चुके हैं । वर्तमान में वो राज्यसभा सांसद हैं । अजय टम्टा केन्द्रीय सरकार में राज्यमंत्री हैं । इस सीट पर भाजपा बढ़त पर नजर आ रही हैं और मोदी लहर साफ देखी जा सकती हैं । राज्य की यह एकमात्र ऐसी सीट हैं जिस पर बीजेपी काफी हद तक सुरक्षित हैं ।

हरिद्वार –

हरिद्वार सीट मैदानी सीट हैं । इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के अलावा बसपा का भी आधार हैं लेकिन फिर भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है । भाजपा ने यहां भी सीटिंग सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को टिकट दिया है और कांग्रेस ने इस बार स्थानीय नेता अंबरीश कुमार को मैदान में उतारा है । बसपा ने अंतरिक्ष सैनी को टिकट दिया है । गौरतलब हैं कि इस सीट पर सैनी वोट अच्छी तादाद में है । भाजपा उम्मीदवार निशंक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उस समय उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे । टिकट वितरण के समय खानपुर से भाजपा विधायक प्रणव सिंह चैम्पियन ने निशंक को टिकट देने का विरोध किया था । दरअसल प्रणव सिंह चैम्पियन अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे । पार्टी में भीतरघात होने का अंदेशा लग रहा था लेकिन समय रहते मामला सुलझा लिया गया और रिपोर्ट्स बता रही हैं कि विधायक अब पार्टी के साथ है । यहां भी मोदी लहर साफ देखी जा सकती हैं । कांग्रेस प्रत्याशी अंबरीश कुमार पुराने राजनीतिक हैं । स्थानीय होने का लाभ भी उनको मिल सकता है लेकिन उनकी छवि दल बदल करने वाले की बनी हुई हैं । उत्तराखंड बनने के बाद से अभी तक वो विधायक का चुनाव भी नहीं जीत सके । इस सीट पर मुकाबला कड़ा होने के बावजूद भाजपा थोड़ा बढत पर नजर आ रही हैं ।

पौड़ी –

इस सीट पर चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर हुआ । बीजेपी के सिटिंग एमपी बीसी खंडूडी के बेटे ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली और अब वो कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं । इस सीट पर कांग्रेस ने यह प्रचार जोर शोर से किया है कि बीजेपी में सीनियर खंडूडी जी का अपमान हो रहा था जिससे आहत होकर उनके बेटे मनीष खंडूडी ने कांग्रेस ज्वाइन की है । इस प्रचार का निश्चित ही कुछ लाभ कांग्रेस उम्मीदवार को मिलेगा लेकिन मनीष खंडूडी क्षेत्र के लिए नये हैं और अभी तक मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करते थे वो राजनीति में भी नये हैं । भाजपा ने यहां से तीरथ सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया है । तीरथ सिंह रावत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं और बहुत समय से राजनीति के हाशिए पर थे । इस बार के विधान सभा चुनाव में उन्हें अपनी सीट चौबट्टाखाल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए सतपाल महाराज के लिए कुर्बान करनी पड़ी थी । तीरथ सिंह रावत ने इसका विरोध भी किया था लेकिन फिर भी पार्टी से बगावत नहीं की और अपना आपा नहीं खोया । तीरथ सिंह रावत ने साबित किया कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं । वो ज़मीन से जुड़े हैं नेता हैं , क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और इसका लाभ भी उनको मिलेगा । यहां भी मोदी लहर है लेकिन खंडूडी जी के कद के हिसाब से मनीष खंडूडी के पक्ष में सहानुभूति भी है । यहां कड़े मुकाबले के आसार है और अभी मामला फिफ्टी फिफ्टी नजर आ रहा हैं ।

नैनीताल –

नैनीताल लोकसभा सीट पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में फैली हैं । यहां भी वैसे तो मुख्य मुकाबला दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बीच ही है लेकिन बसपा और अन्य दलों ने भी अपने प्रत्याशी उतारे है । यहां पर टिकट वितरण के समय दोनों दलों में दावेदारों की भरमार थी और दोनों ही पार्टियों ने अप्रत्याशित फैसले लिये , इससे टिकट नहीं मिलने से निराश दोनों पार्टियों के दावेदारों और उनके समर्थकों ने अपनी निराशा खुलकर ज़ाहिर की । पार्टियों के भीतर खेमेबंदी अभी तक है कांग्रेस के भीतर कुछ कम है और बीजेपी के भीतर कुछ ज्यादा है । कांग्रेस ने इस बार हरीश रावत को उम्मीदवार बनाया है तो भारतीय जनता पार्टी ने अजय भट्ट को टिकट दिया है । अगर देखा जाये तो इस सीट पर दोनों ही पार्टियों ने ऐसे उम्मीदवीरों पर दांव खेला हैं जिनकी राजनीतिक सेहत इस समय दुरूस्त नहीं है । अजय भट्ट जननेता नहीं है और वो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते हुए ऐसे समय विधायक का चुनाव हारे जब उनकी पार्टी ने राज्य में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर सत्ता हासिल की । वो पहले भी विधायक का चुनाव हार चुके हैं । लोकसभा चुनाव में वो पहली बार हिस्सा ले रहे हैं । हरीश रावत बहुत अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं लेकिन उनकी राजनीतिक किस्मत अस्थिर रही हैं । हरीश रावत ने ब्लॉक स्तर से राजनीति शुरू की और 1985 में लोकसभा के लिए चुनें गए । वो लगातार 1985 , 1989 और 1991 का चुनाव जीते । भाजपा के दिग्गज मुरली मनोहर जोशी को हराया लेकिन 1996 में बीजेपी के बची सिंह रावत से हारे तो हारते ही चले गए । उत्तराखंड में कांग्रेस को सत्ता दिलायी लेकिन मुख्यमंत्री पद पर नारायण दत्त तिवारी को बैठाया गया । हरीश रावत ने बीच में भी कुर्सी पाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे । राजनीति डूबने ही वाली थी कि 2009 में हरिद्वार लोकसभा चुनाव में जीत से डूबते कैरियर को नयी संजीवनी मिल गई । केन्द्र सरकार में पहले राज्यमंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री बने बाद में राज्य के मुख्यमंत्री भी बने और फिर राजनीतिक किस्मत ने यू टर्न ले लिया । पत्नी हरिद्वार से लोकसभा चुनाव हार गई । मुख्यमंत्री रहते पार्टी में जबरदस्त टूट हो गई , सरकार बर्खास्त कर दी गई जिसे कोर्ट ने बहाल किया था । यह अवसर था सहानुभूति प्राप्त करने का लेकिन विधान सभा चुनाव में दो सीट से चुनाव लडकर , दोनों से हार गए , पार्टी ने अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया । अब दोनों ही प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर है जो भी हारेगा वही राजनीति के हाशिए पर चला जायेगा । मुकाबला बेहद कड़ा है कौन जीतेगा बताना मुश्किल है । वैसे एक अंडर करेन्ट हैं मोदी लहर का । जिससे बात करते हैं तो कहता हैं कि बीजेपी जीतेगी लेकिन यदि आगे यह बोल दें कि अजय भट्ट जीतेगा तो तुरंत प्रतिक्रिया आती हैं कि अजय भट्ट को नहीं वोट मोदी जी को दिया जायेगा ।

टिहरी –

यह प्रदेश की ऐसी सीट हैं जिस पर इस बार कांग्रेस बढ़त में नजर आ रही हैं । यहां भी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में मुकाबला हैं । बीजेपी ने इस सीट पर अपने परम्परागत प्रत्याशी टिहरी रियासत के राजपरिवार की रानी माला राज्यलक्ष्मी शाह को टिकट दिया है वो सीटिंग सांसद हैं और दो बार जीत चुकी हैं । लेकिन इस बार रानी की डगर मुश्किल भरी है । कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को मैदान में उतारा है । प्रीतम सिंह साफ स्वच्छ छवि के कद्दावर नेता हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ हैं । टिहरी लोकसभा सीट के शहरी क्षेत्रों में बेशक मोदी लहर है लेकिन दूरदराज के और ग्रामीण इलाकों में यह चुनाव महलों की रानी बनाम जनता के बीच का आदमी बन गया है । रानी दो बार से सांसद हैं लेकिन इस बार उनकी शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल खड़े हों रहे हैं । अचानक से ऐसे सवाल तभी खड़े होते हैं जब जनता ज्यादा नाराज हो और रानी को यह नाराज़गी भारी पड़ सकती हैं । टिहरी में इस बार बेहद कड़ा मुकाबला होगा ।

फैसला जनता को करना है जो 11 अप्रैल को करेगी और जिसका पता 23 मई को चलेगा । देशहित में सभी मतदान अवश्य करें ।

राम वशिष्ठ : लेखक विद्युत विभाग में कार्यरत हैं । स्वतंत्र फ़िल्मकार होने के साथ ही राजनीतिक विचारक भी हैं ।