आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-कृत नेता-चालीसा के कुछ अंश

एक--
चालीसा नेता लिखैं, 'पण्डित पृथ्वीनाथ'।
झोरि-झोरि नेता कहैं, भूलै लियो न साथ।।

दो--
नेता जीव अजीब बा, दूहैं जनता रोज।
दुइ डेग जनतौ बढ़ैन, करै वैसहीं खोज।।

तीन--
फँसा राम दुइ फाँक मा, अस चोरन क बीच।
दुइनो अस लागत रहैं, बजबजात-जस कीच।।

चार--
आग लगावैं आपहूँ। पानी लै-लै जाहिं।
सीना तानि उतानि कै, जें साबासी पाहिं।

पाँच--
आपन लोग बचाय कै, दूजा देयँ फँसाय।
नीति बनावैं आपहूँ, भट्ठा देयँ बिठाय।।

छ:--
ईडी ओकरै हाथि मा, खुफिया अरू बिधान।
चाहे जब ऊ बेचि दे, खेत अउर खरिहान।।

सात--
नेता कुटिल सुभाव बा, भुले गाँव अरु देस।
उड़न खटोला मा चढ़ैं, बदलि-बदलि कै भेस।।

आठ--
नेता खाली लेत हय, देवै भासन रोज। 
भूँकत कुक्कुर-जस फिरै, लेवै काहु न खोज।।

नौ--
नेता-पूत सुपूत बा, गुण्डा मा बा एक।
गोली-बम मा दछ रहै, भले अँगूठा टेक।।

दस--
लूटैं-खायें देस मा, देवैं मूँछन ताव। 
जनता मरै अभाव मा, का कमाव का खाव।।

ग्यारह--
पोथी पढ़ि-पढ़ि बढ़ि रहैं, नेता बनै न एक। पिस्टल लहरातन दिखैं, नेता बनै अनेक।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ जून, २०२२ ईसवी।)