सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

लखनऊ में अमानवीय शोषण के खिलाफ सड़को पर आंदोलन की सूत्रधार “पूजा”

एक 'पूजा' से पूरा लखनऊ गूंजा

पूजा शुक्ला

आशाराम (शोधार्थी हिन्दी विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय)-


भारतीय पुलिसिया ढाँचा छीन चुके सामंती ठसक और ताकत का विधिसम्मत रूप है । जमींदारी प्रथा,खासकर उत्तर भारत मे इसके उन्मूलन के फलस्वरूप सवर्ण सामन्तों के संततियों को लोक सेवा आयोग / पुलिस भर्ती बोर्ड ने हस्त-रिक्त हो चुके शोषणकारी, दमनकारी शक्तियो को लोकतांत्रिक तरीके से पुनः हस्तगत करने और शासक वर्ग के अनुरूप ‘सेवा’ करने का अवसर प्रदान किया तो शोषित, दमित समूहों को भी अप्राप्त सामंती रसूख को पाने मौक़ा उपलब्ध कराया। आज़ाद भारत मे लोक सेवा आयोग जैसे प्रतिष्ठान नवसामन्तो और शासकीय मानसिकता की जमात पैदा करने वाली संस्था बनकर रह गए है। कहने की आवश्यकता नही है कि वर्तमान समय मे यह नाम से भले लोक सेवा आयोग है लेकिन यह वस्तुतः है ‘लोक स्वामी आयोग’ ही। और यहाँ से अधिकतर लोकसेवक के बजाय लोकस्वामी ही निकलते है।और ये कथित लोकसेवक लोक-व्यवहार मे ‘स्वामी’ की ही तरह वर्ताव करते है और जनसामान्य को ‘रियाया’ ही समझते है।लेकिन जन सामान्य की एकजुटता उनकी प्रतिरोधी ताकत और जनवादी नेतृत्व के सम्मुख न जाने कितनी रियासते,हस्तियां और रजवाड़े जमीदोंज हो गए तो इनकी औकात ही क्या है।…अभी कुछ दिन पहले upsssc की भर्तियो के साक्षात्कार पर से रोक हटाने को लेकर छात्रों-नौजवानों का बड़ा हुजूम मार्च कर रहा था तो शासक वर्ग के इशारे पर यही पुलिस ने बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया था। अब लखनऊ विश्वविद्यालय के एकाध होस्टलों मे कुछ अराजक तत्वों के आगे कुलपति और उनका प्रशासन घुटने टेकते हुए सारे होस्टल के मेस को बंद कर देने का तालिबानी फरमान जारी कर दिया जिसके विरोध-स्वरूप छात्रों ने कुलपति आवास का घेराव किया था।कुलपति महोदय के इशारे पर ‘लोकस्वामी’ छात्रों से बदतमीजी करते हुए धक्के मारकर बाहर निकालने लगे ,उसी समय एक पुरजोर आवाज़ गूंजी और वह आवाज़ थी एक ऐसी शख्सियत की, जो फलस्तीन से लेकर चिली और हिंदुस्तान के किसी भी कोने मे हो रहे दमन और अमानवीय शोषण के खिलाफ सड़को पर आंदोलनों की शक्ल मे मौजूद रहती है उसका नाम है–पूजा शुक्ला। जो अपने को डिकास्ट(जाति-मुक्त) करके दलित – आदिवासी-अल्पसंख्यक हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हरावल दस्ते के रूप मे मौजूद रहती है। जब पुलिस छात्र नेताओं और आम छात्रों को उनकी बात सुनने के बजाय जबरन बाहर धकेल रही थी तब पूजा ने ही आगे आकर उनकी औकात बता दी!ए एस पी दुर्गेश कुमार और उनके लाव-लश्कर मुँह मे गुटखा और पान चबाते हुए लोगो से बात कर रहे थे तब पूजा ने ही कहा मै आप और आपकी चौकड़ी से तभी बात करूंगी जब आप अपने ‘आका'(शासक) के निर्देशों के अनुसार -ड्यूटी के समय नशा न करने का पालन करेंगे-।पूरा महकमा छात्रों को हटाने के बजाय थुर्र-थुर्र-थुर्र करते हुए बगले झाँकने लगा।कुलपति महोदय दड़बे मे हो लिए! लखनऊ की पूरी पुलिस मशीनरी हैरान है !अब सुनने मे आया है कि ए. एस. पी. और उनके लश्कर को ‘ऑन ड्यूटी ‘ गुटखा चबाने का नोटिस मिला हुआ है और ये महोदय ‘स्थानीय सूचना इकाई ‘ से पता लगा रहे है कि वो कौन लड़की है…महाशय वह लड़की नही ज़्वाला है जिसके तपिश से न जाने कितने विश्वविद्यालय के गुंडे,लम्पट आज दीदी दीदी कहते घूमते है।तुमने अभी देखा क्या है? उसका तो एक ही फार्मूला है!
दम है कितना दमन मे तेरे
देखा है और देखेंगे !