गरीबी के दौर में सड़ते हुए सरकारी तंत्र के बीच बीमारी ने गुड्डी की छीनीं सांसें

हरदोई- गरीबी के दौर में सड़ते हुए सरकारी तंत्र के बीच बीमारी ने गुड्डी की सांसें छीन लीं । बीमारी की मार न झेल पाने से गोपाल की पत्नी गुड्डी ने गुरूवार को दम तोड़ दिया। हालांकि गोपाल की परिस्थितियों को जानने के बाद इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया। जिसके बाद तमाम जागरूक लोगों ने गोपाल की मदद को हाथ बढ़ाये थे।

गोपाल का हौसला भी बढ़ा, उसके 08 साल के बेटे की आंखों में भी चमक दिखाई दे रही थी। किन्तु सिस्टम की अनदेखी ने गुड्डी की सांसें ही छीन ली। अब हर किसी की जुबां पर बस यही है कि उसका समुचित इलाज समय से हो जाता तो गोपाल का परिवार गरीबी में ही सही पर सकुशल तो होता।

मूल रूप से अहिरोरी ब्लॉक के वाजिदपुर गांव के निवासी गोपाल का अपने गांव में कोई वजूद न रहा, तो उसने पास के ही शुक्लापुर गांव में आश्रय लिया। पत्नी गुड्डी व 08 साल के बेटे के साथ वह दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ कर पाता था कि इसी बीच पत्नी बीमार हो गयी। बीमारी ने ऐसा जकड़ा कि उसे दोबारा अस्पताल के बेड से उठने की मोहलत ही न मिली। बेटे की बेबसी व पत्नी की बीमारी से व्यथित गोपाल की मुलाकात 07 जनवरी को हुई तो उसकी जिंदगी के हालात सभी के सामने आए। खबर प्रसारित होने के बाद कई समाजसेवियों व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने मदद शुरू की। किन्तु 02 दिन बाद ही गुड्डी ने अस्पताल के बेड पर दम तोड़ दिया।

स्वास्थ्यकर्मियों ने की लापरवाही

गुड्डी के पति गोपाल ने बताया कि जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी इंजेक्शन, ग्लूकोज आदि लगाने में लापरवाही करते थे। रात में गुड्डी को इंजेक्शन लगना था तो वह ड्यूटीरूम में ताला देखकर आईसीयू में गया, जहां मिले एक कर्मचारी से लाख मिन्नते करता रहा किन्तु वह इंजेक्शन लगाने नहीं आया तो गोपाल ने रात में मेडिकल से लाकर दर्द की दवाई गुड्डी को दी। अन्य मरीजों ने बताया कि जो पैसे खर्च करता है उसी की देखरेख व सही उपचार यहां होता है। इस मामले की शिकायत 1076 व सीएमएस से भी की गई थी।

मदद को इन्होंने आगे बढाए हाथ

एलआईसी के राजेश द्विवेदी, नेकी की दीवार के सचिन मिश्रा व उनकी टीम, शाखा प्रबन्धक एसएन श्रीवास्तव, उप प्रबंधक शैलेन्द्र मिश्रा, अशोक सिंह, राजीव मिश्रा, धीरेश बाजपेयी, मनोज दीक्षित सदरियापुर, आलोक मिश्रा, अनुराग शुक्ला मिंटू, अनिल बाजपेयी, अमित त्रिवेदी हरियावां, अखिल सिंह चंदेल, पवन सिंह चंदेल, प्रकाश बाजपेई, प्रत्यक्ष अवस्थी, विनीत त्रिवेदी, अनुराग तिवारी, प्रखर अग्निहोत्री, नीरू सिंह, राजवर्धन सिंह राजू, विजय मोहन बाजपेयी एडवोकेट, दैनिक जागरण, मानवता फाउंडेशन आदि।

सरकार के सिस्टम पर भी सवाल

गरीबों के इलाज के लिए सरकार के पास विभिन्न कोष हैं। विधायक, सांसद को अधिकार है कि वह 01 लाख तक का इलाज सरकारी खर्चे पर करा सकता है। इसके अलावा सरकार की आयुष्मान भारत योजना भी चल रही है । किंतु गोपाल की पत्नी की इलाज के अभाव में हुई मौत ने सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधियों ने जरा सी भी मानवता दिखाई होती तो गरीब कुनबे में आज मातम नहीं मनाया जाता। इससे पूर्व भी जिले के कई स्थानों पर इलाज के अभाव में गरीब दम तोड़ चुके हैं। 

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