सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

कई साल बाद लेखानुदान पेश नहीं किया गया

वित्त मंत्री अरुण जेटली की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बजट प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरा करने और लेखानुदान नहीं लाने के लिये सराहना की। कई वर्षों के बाद यह पहला मौका है जब लेखानुदान लाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं वित्त मंत्री को बजट प्रक्रिया, सभी व्यय प्रस्ताव और वित्त विधेयक से संबंधित सभी मामलों को 31 मार्च तक संसद के दोनों सदनों से मंजूरी प्राप्त करने को लेकर बधाई देता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कई साल बाद लेखानुदान पेश नहीं किया गया। मुझे याद नहीं आता कि कितने साल बाद ऐसा हुआ है।’’
नये वित्त वर्ष के लिये बजट के पारित नहीं होने पर लेखानुदान पेश किया जाता है। इस अंतरिम व्यवस्था के तहत जरूरी खर्च के लिये देश की संचित निधि से धन निकासी हेतु संसद की मंजूरी ली जाती है। मुखर्जी राष्ट्रपति भवन में लकी ग्राहक योजना और डिजि धन व्यापार योजना के ‘मेगा ड्रा’ के बाद यह बात कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने इस साल बजट एक महीने पहले एक फरवरी को पेश किया। अबतक इसे 28 फरवरी या माह की अंतिम तारीख को पेश किये जाने की परंपरा थी। इस कदम का मकसद नये वित्त वर्ष की शुरूआत एक अप्रैल से ही निवेश शुरू करने के लिये सरकार की मदद करना है। करीब एक सदी से रेल बजट को अलग से पेश करने की चली आ रही परंपरा को भी समाप्त किया गया और इसे आम बजट में मिला दिया गया। राष्ट्रपति 12 अंकों वाला विशिष्ट पहचान संख्या आधार का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश की वृद्धि कहा कहानी में एक ‘ऐतिहासिक घटना’ है।