प्रो० राजेन्द्र सिंह रज्जू भईया स्मृति व्याख्यानमाला 2023 सम्पन्न

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे जीवन कौशल की उपादेयता विषय पर हुई संगोष्ठी
  • भूत पूर्व सर संघचालक रज्जू भैया के शिष्य पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेन्द्र सिंह गौर थे मुख्य वक्ता
  • वरिष्ठ चिंतक वीरेश्वर द्विवेदी, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी व कुलपति प्रो. आलोक राय ने रखे विचार
  • लखनऊ विश्वविद्यालय में खुलेगा रज्जू भैया रूरल रिसर्च सेंटर, उच्च शिक्षा मंत्री ने की घोषणा।
  • भाग्योदय प्रमुख आचार्य राम महेश मिश्र समेत अनेक संस्थाओं के मुखिया व गण्यमान विचारक मौजूद रहे।

लखनऊ। राजेन्द्र सिंह (रज़्जू भईया) स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघ चालक प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज़्जू भईया) की जन्म शताब्दी के अवसर पर स्मृति व्याख्यान माला की पाँचवी कड़ी का विशेष कार्यक्रम रविवार शाम लखनऊ विश्वविद्यालय के चाणक्य सभागार में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. योगेन्द्र उपाध्याय मुख्य अतिथि थे। श्रीमती रजनी तिवारी, राज्य मंत्री उच्च शिक्षा एवं लेखक व विचारक डा. रतन शारदा आदि की विशिष्ट उपस्थिति में मुख्य वक्ता रज़्जू भईया के पूर्व छात्र एवं पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डा. नरेन्द्र सिंह गौर ने रज्जू भैया के अनूठे जीवन वृत्तान्त सुनाए। बतौर विशिष्ट वक्ता आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक वीरेश्वर द्विवेदी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सभागार में अनेक समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों के अलावा लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में भागीदारी की।

ज्ञातव्य हो, विश्व हिन्दू परिषद के जाने-माने हस्ताक्षर वीरेश्वर द्विवेदी रज़्जू भईया के लंबे समय तक सहयोगी रहे। उन्होंने अपने संस्मरण सुनाते हुए बताया कि कैसे रज़्जू भईया मितव्ययिता के साथ सादा जीवन व्यतीत करते थे और सदा देश के लिए सोचते हुए ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ की भावना के अनुरूप व्यवहार को अपनाते थे। उन्होंने कहा कि रज़्जू भईया कहते थे कि हिन्दुओं को समस्या किसी दूसरे धर्म से नहीं बल्कि समस्या दूषित मानसिकता से है।

मुख्य वक्ता पूर्व उच्च शिक्षा मन्त्री डॉ. नरेन्द्र सिंह गौर का कहना था कि परिवार से सम्पन्न होने के बावजूद रज्जू भैया ने अपने लिए कोई संपत्ति नहीं बनाई और अपना मकान इत्यादि भी समाज के कार्य के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रोफेसर रहे डॉ. राजेन्द्र सिंह उर्फ रज़्जू भईया ने जब सेवा से त्याग-पत्र दिया तब मुझे ही उनका विषय पढ़ाने के लिए दिया गया था। रज्जू भैया छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ाते थे। शिक्षा के माध्यम से संस्कार मिलें, इसलिए रज्जू भैया ने सरस्वती शिक्षा मंदिरों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. गौर ने कहा कि अपने उच्च शिक्षा मंत्री काल में मैंने समयानुकूल कुछ बातें पाठ्यक्रम में शामिल कराईं। अब नई शिक्षा नीति 2020 में उन सभी का समावेश किया गया है ।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने रज़्जू भईया को याद करते हुए जीवन कौशल की महत्ता और आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा इसको व्यापक बनाए जाने पर जोर दिया। जीवन कौशल की उपादेयता पर बल देते हुए श्रीमती तिवारी ने कहा कि युवाओं को मानसिक दबाव के तहत कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए, उन्हें अपनी योग्यता को पहचानना चाहिए। उन्हें किसी का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन कौशल के प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। विपरीत परिस्थितियों में युवाओं को जब कोई राह न दिखे तब जीवन कौशल ही काम आता है, इसके माध्यम से युवा योग्यता व आत्मविश्वास से अपनी बात कहता है। उन्होंने युवाओं को प्रेरणा दी कि वे अपना जीवन लक्ष्य निर्धारित करें एवं सकारात्मक व्यवहार अपनाएं।

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि रज़्जू भईया का जीवन स्वयं जीवन कौशल का उदाहरण था। उनके बताए मार्ग को यदि जीवन में उतार लिया जाए तो फिर जीवन कौशल को अलग से सीखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया का जीवन दर्शन पढ़ने से एवं उस पर चिंतन मनन करने से जीवन कौशल परिष्कृत होगा एवं व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होगा। रज़्जू भईया को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने रज़्जू भईया के नाम से लखनऊ विश्वविद्यालय में रुरल साइंस रिसर्च सेंटर भौतिक शास्त्र विभाग में खोले जाने की घोषणा की।

मुम्बई से पधारे डा. रतन शारदा की किताब दी लाइफ एण्ड टाइम्स ऑफ रज़्जू भईया का विमोचन इस अवसर पर किया गया। रतन शारदा ने बताया कि रज्जू भैया कहते थे कि काम के समय यदि विदेशी परिधान हो तो भी कम से कम उत्सव में सबको भारतीय गणवेश में रहना चाहिए, जिससे हमारे संस्कार सशक्त हों। रज्जू भैया कहते थे कि कार्यकर्ता को सपरिवार गांव में जाना चाहिए, जिससे कि बच्चे जड़ों से जुड़े रहें।

इस अवसर पर इंजीनियर गौरव गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। श्री गुप्ता लखीमपुर जिले में गौ आधारित कृषि व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। उन्हें भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं भाग्योदय फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार डा. कमल टावरी का सहयोग प्राप्त है । वह विशेषज्ञ अस्तर के चुनिंदा लोकसेवियों के साथ मिलकर ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहे है। श्री गुप्ता को उच्च शिक्षा मंत्री जी द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर को प्रो. राजेन्द्र सिंह स्मृति संस्थान के महामंत्री एवं कार्यक्रम संयोजक अजय सिंह ने पिछले चार वर्षों में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जीवन कौशल के ज्ञान को विद्यार्थियों और नौजवानों के बीच ले जाने की योजना प्रस्तुत की। उन्होंने राज्य सरकार के साथ सहयोग कर अगले एक वर्ष में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक योजनाओं को पहुंचाने की बात कही।

कार्यक्रम का संचालन अक्षय प्रताप सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस प्रभारी प्रोफेसर अंशुमाली शर्मा ने किया ।