ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

जीन्द ने सरकार की नींद की हराम

न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार ने कहा– आ बैल! ले मार

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

यह कथन सिद्ध होता है– जब-जब राजा डरता है-क़िलाबन्दी करता है। ग़ाजीपुर बॉर्डर पर चारों ओर यही दिख रहा है; परन्तु उस सरकारी कुकृत्य से हमारे किसानों का उत्साह और साहस शिथिल किया जा सकता है?

पहली ओर, ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ कह रही है कि एक फ़ोन काल से हम किसान के साथ बात करने के लिए उपलब्ध हो जायेंगे, जबकि दूसरी ओर, किसान-आन्दोलन-मार्ग पर कँटीले तार, नुकीली कीलें, लोहे/स्टील की नुकीली कीलोंवाली लाठियों से युक्त पुलिस-बल की घेराबन्दी कर, किसानों को भयभीत करनेवाली सरकार की रणनीति इस बात की सूचिका है कि सरकार किसान की माँगों के प्रति गम्भीर नहीं है। निस्सन्देह, निरंकुश और अहम्मन्य सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बेशक, गिनती धीमी गति में चल रही है; किन्तु ठोस रूप में की जा रही है।

किसानों का आन्दोलन विचार-स्तर पर अब और उग्र हो चुका है, जो कि स्वाभाविक है। यही कारण है कि ‘कल’ तक आततायी सरकारी रणनीति के कारण जो आन्दोलन टूटता दिख रहा था, अब वह सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ने लगा है। अब इस आन्दोलन के साथ ‘खाप पंचायत’ की सक्रिय भागीदारी हो चुकी है। इस आन्दोलन में नारीशक्ति की सहभागिता से किसान-आन्दोलन जीवन्त हो चुका है।

इसे रेखांकित करता है, आज (३ फ़रवरी) की तारीख़ में जीन्द (हरियाणा) में किसानों की प्रभावकारी महापंचायत का होना। उसमें प्रमुख किसान-नेता राकेश टिकैत की विशेष भागीदारी थी। महापंचायत में पाँच प्रस्ताव पारित किये गये हैं :– (१) तीनों अधिनियमों को समाप्त किया जाये। (२) न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक रूप दिया जाये। (३) स्वामिनाथन् आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाये (४) किसानों के ऋण माफ़ किये जायें। (५) २६ जनवरी को गिरिफ़्तार किये गये लोग और ट्रैक्टरों को छोड़ा जाये।

अब देखना है, ऊँट किस करवट बैठेगा?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ फ़रवरी, २०२१ ईसवी।)

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