पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति शिखर सम्मान समारोह सम्पन्न

वर्ष २०१७ के लिए : श्री नीलकान्त को ‘साहित्य-शिखर सम्मान’, श्री रवीन्द्रकुमार पाण्डेय को ‘मीडिया-शिखर सम्मान’ तथा श्री शरद द्विवेदी को ‘युवा मीडिया शिखर सम्मान’।

वर्ष २०१८ के लिए : प्रो० अनिता गोपेश को ‘साहित्य-शिखर सम्मान’, श्री रमाशंकर श्रीवास्तव को ‘मीडिया-शिखर सम्मान’ तथा श्री ईश्वरशरण शुक्ल को ‘युवा मीडिया-शिखर सम्मान’।

हेरम्ब जी ‘ऋषि-परम्परा’ के सन्त और साधक पत्रकार थे : प्रो० पारसनाथ पाण्डेय

“निस्सन्देह, पं० हेरम्ब मिश्र जी जिस उत्तुंग शिखर पर पहुँचे थे, उसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या और साधना की होगी। उनके कार्यक्षेत्र-विस्तार को देखकर यह कहना सर्वथा उचित है कि वास्तव में, हेरम्ब जी ‘ऋषि-परम्परा के सन्त और साधक पत्रकार थे। उनका स्वभाव बहुत सरल था। यही कारण है कि वे प्रत्येक ज्ञानपिपासु का समुचित मार्गदर्शन करते थे। उनकी वही सरलता आज के उन पत्रकारों में दिखनी चाहिए, जो शीर्ष स्थान पर है। ” मुख्य अतिथि के रूप में सभा को सम्बोधित करते हुए, नेहरू ग्रामभारती विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्तरराष्ट्रीय गणितविज्ञानी प्रो० पारसनाथ पाण्डेय ने वर्तमान पत्रकारिता को जोख़िमभरा बताते हुए आगे कहा, “पत्रकारों का जीवन कितने ख़तरों से भरा रहता है, आज इसे भी समझने की आवश्यकता है। वह यदि सही बात लिखता है तो स्वयं के लिए ख़तरे भी उपस्थित करता है। ऐसे में, उसका संरक्षण भी आवश्यक है। ” समारोह की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के प्रधानमन्त्री श्री विभूति मिश्र ने ‘पत्रकारिता में बाज़ारवाद के प्रभाव’ पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा, “बाज़ारवाद के बढ़ते साये ने आज पत्रकारिता को जकड़ रखा है। यही कारण है कि कोई भी पत्रकार पत्रकारिता को ‘मिशन’ के साथ जोड़ने में सहम जाता है। समाज आज तेज़ी में करवट ले रहा है, हमें इसे समझने और गम्भीरतापूर्वक लेने की आवश्यकता है।

” डॉ० रामनरेश त्रिपाठी ने वर्ष १९४२ से वर्तमान पत्रकारिता का विश्लेषण करते हुए उसकी संक्रमणकालीन दशा और दिशा को शोचनीय बताया। उन्होंने कहा,”आज पत्रकारिता एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहाँ पहुँचकर सोचना पड़ता है, हम किधर से जायें; कैसे जायें। ऐसे में ही हेरम्ब जी की पुस्तक ‘पत्रकारिता : संकट और सन्त्रास’ हमारे सम्मुख उभरती है।” इससे पूर्व डॉ० इन्दुप्रकाश मिश्र ने अपना लोकगीत-गायन कर, माँ शारदा की प्रार्थना की। स्मरणीय है कि ‘पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति पत्रकारिता संस्थान’ की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होनेवाला समारोह पिछले वर्ष न हो सका था, इसलिए इस समारोह में पिछले और वर्तमान वर्ष के शिखर सम्मान आज दिये गये थे, जिसमें समारोह के अध्यक्ष और मुख्य अतिथि ने वर्ष २०१७ के लिए श्री नीलकान्त को ‘साहित्य-शिखर सम्मान’, श्री रवीन्द्रकुमार पाण्डेय को ‘मीडिया-शिखर सम्मान’ तथा श्री शरद द्विवेदी को ‘युवा मीडिया-शिखर सम्मान’ से समलंकृत किया था, जबकि वर्ष २०१८ के लिए प्रो० अनिता गोपेश को ‘साहित्य-शिखर सम्मान’, श्री रमाशंकर श्रीवास्तव को ‘मीडिया-शिखर सम्मान’ तथा श्री ईश्वरशरण शुक्ल को ‘युवा मीडिया-शिखर सम्मान’ से आभूषित किया गया था। इस अवसर पर सम्मानित सारस्वत हस्ताक्षरगण ने अपने मनोभाव को व्यक्त किया था। इसी क्रम में श्री रवीन्द्रकुमार पाण्डेय ने कहा, “मैं कभी पत्रकारिता-क्षेत्र में किसी से डरा नहीं, बल्कि अपने कलम से सत्य का उद्घाटन करते हुए, बेईमानों का चरित्र उजागर किया था।” श्री शरद द्विवेदी ने इस सम्मान से ऊष्मा और ऊर्जा मिलने की बात करते हुए, दायित्व की गम्भीरता को स्पष्ट किया था। प्रो० अनिता गोपेश ने कहा, “सम्मान लेना एक बहुत बड़ा दायित्व होता है; क्योंकि आपके सामने अपने दायित्व के निर्वहन करने की बराबर चुनौती खड़ी रहती है।” श्री रमाशंकर श्रीवास्तव ने कहा, “पत्रकारिता कल महान् थी; आज महान् है तथा कल भी महान् रहेगी।” श्री ईश्वरशरण शुक्ल का मत था, “साहित्य मेरा जीवन है और पत्रकारिता जीविका है।” संस्थान के निदेशक श्री बंशीधर मिश्र ने अगले वर्ष के समारोह में पं० हेरम्ब मिश्र पर आधारित स्मारिका मुद्रित करने की घोषणा की थी। संस्थान के अध्यक्ष श्री गंगाधर मिश्र ने अभ्यागतगण के प्रति आभार-ज्ञापन किया था। समारोह का संयोजन और संचालन डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने किया था। समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ था।

इस अवसर पर हरिशंकर त्रिपाठी, डॉ० पूर्णिमा मालवीय, मोहिनी कुमारी, तलब जौनपुरी, कैलाशनाथ पाण्डेय, डॉ० वीरेन्द्र तिवारी, तनु शर्मा, भाव्या, मीनाक्षी मिश्र, कन्हैया शर्मा, जगन्नाथ शुक्ल, रविरंजन पाण्डेय, साकेत त्रिपाठी, शशिधर मिश्र, सृष्टिधर मिश्र, मोनिका शर्मा, आशुतोष मिश्र, उर्वशी उपाध्याय, केशव सक्सेना, आलोक शुक्ल, डॉ० रवि मिश्र, सुषमा रावत, अभय अवस्थी, अमरनाथ झा, रणविजय निषाद, प्रमोद शुक्ल, कविता उपाध्याय, अजय पाण्डेय, अरविन्द वर्मा, आनन्द प्रकाश दीक्षित आदिक उपस्थित थे।

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