वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने ग़लत प्रश्नोत्तर और शब्द-अशुद्धियोँ का दावा किया

राजस्थान पी० सी० एस०–जे० (प्रा०)-परीक्षा के प्रश्नपत्र मे कई प्रश्न और उत्तर-विकल्प ग़लत तथा अशुद्धियोँ की भरमार!

विगत २३ जून को सम्पन्न राजस्थान पी० सी० एस०– जे० (प्रा०) परीक्षा के ‘बुकलेट सीरीज़ बी’ के प्रश्नपत्र मे विधि, अँगरेजी तथा सामान्य हिन्दी/हिन्दी-भाषा के प्रश्नो मे बड़ी संख्या मे अशुद्धियाँ दिख रही हैँ। वे अशुद्धियाँ शब्द-प्रयोग मे तो हैँ ही, प्रश्नात्मक वाक्योँ और उत्तर-विकल्प मे भी हैँ। ऐसे उत्तर-विकल्प दिये गये हैँ, जिनमे दो-दो उपयुक्त उत्तर हैँ। ऐसे मे, परीक्षार्थी किस उत्तर को उपयुक्त समझे और किसे अनुपयुक्त, उसके सम्मुख यह एक महाप्रश्न था।

वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने हाल ही मे सम्पन्न राजस्थान पी० सी० एस०– जे० (प्रा०) की परीक्षा के पूरे प्रश्नपत्र मे बड़ी संख्या मे शब्दप्रयोग और ग़लत प्रकार के प्रश्न और उत्तर-विकल्प पर सकारण प्रकाश डालते हुए बताया है कि जिन परीक्षार्थियोँ ने हिन्दी-माध्यम मे परीक्षा दी थी, उनके साथ सम्बन्धित प्राश्निक (प्रश्नपत्र बनानेवाले) ने क्रूर और अक्षम्य कृत्य किया है।

आचार्य ने सामान्य हिन्दी/हिन्दी-भाषा के प्रश्नो और उत्तर-विकल्प की अशुद्धियोँ की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होँने बताया कि प्रश्न 71 से आरम्भ हुए हिन्दी-भाषा के प्रश्नो मे से प्रश्न 75 मे चार प्रकार की अशुद्धियाँ हैँ :– (१)विस्मयादि बोधक (सामासिक दोष) की जगह ‘विस्मयादिबोधक’ (२) चिन् ह’ की जगह ‘चिह्न’ (वर्तनी-दोष) (३) प्रयोग वाला (प्रत्यय-दोष) की जगह ‘प्रयोगवाला’ (४) – (निर्देशक-चिह्नदोष) की जगह :– (विवरण-चिह्न) होगा। प्रश्न 76 मे प्रत्यय-दोष है; वहाँ ‘बननेवाला’ और ‘क्रिया-रूप’ होगा। प्रश्न 77 मे ‘प्रयोग-हेतु’ और ‘शब्दवाला’ होगा। प्रश्न 80 मे ‘थोड़े से लाभ’, ‘छोटे से वस्तु’ तथा ‘जरा से काम’ के स्थान पर ‘थोड़े-से लाभ’, ‘छोटी-सी वस्तु’ तथा ‘ज़रा-सा काम’ होगा। प्रश्न 82 के समस्त उत्तर-विकल्प मे अन्तिम शब्द से पूर्व ‘तथा’ लगेगा। प्रश्न 83 का प्रश्न और उत्तर-विकल्प ग़लत हैँ; क्योँकि प्रश्न मे एक अशुद्ध शब्द पूछा गया है, जबकि दो उत्तर-विकल्प (1) आभ्यर्थी और (2) स्वातन्त्रय अशुद्ध हैँ। इसप्रकार दोनो अशुद्ध हैँ। अब प्रश्न है, परीक्षार्थी किसे अशुद्ध माने?

पहले प्रश्न के उत्तर-विकल्प मे आठ अशुद्धियाँ हैँ। शुद्ध हैँ :– (१) विशदीकरण-हेतु (२) साक्षियों (३) के (४) पूर्व-परीक्षा-हेतु (५) विवाद्यकों के (६) खोज-हेतु (७) तथ्यों के (८) खोज-हेतु। इस प्रश्नपत्र मे बड़ी संख्या मे ‘निम्न’ और ‘उपरोक्त’ के प्रयोग किये गये हैँ, जो कि अशुद्ध हैँ; वहाँ ‘निम्नलिखित’ और ‘उपर्युक्त’ होगा। बड़ी संख्या मे ऐसे प्रश्न हैँ, जिनके वाक्यान्त मे निर्देशक-चिह्न (–) दिख रहे हैँ, वहाँ विवरण-चिह्न (:–) लगाया जाना चाहिए था। प्रश्नो से लाघव चिह्न (०), योजक-चिह्न (-), अल्प विरामचिह्न (,) की पूरी तरह से उपेक्षा की गयी है। शब्द-विशेष को रेखांकित करने के लिए एकल उद्धरण-चिह्न (‘….’) का प्रयोग किया जाता है, जबकि बड़ी संख्या मे युगल उद्धरण-चिह्न (“….”) का प्रयोग किया गया है। किसी उत्तर-विकल्प मे पूर्ण वाक्य के बाद पूर्ण विराम-चिह्न कहीँ भी नहीँ लगाये गये हैँ। प्रश्न 6. मे लिंग-दोष देखेँ– विलेख कहलाती है, जबकि ‘विलेख कहलाता है’ होगा। ‘प्रावधान’ की जगह ‘प्रविधान’ होगा। प्रश्न 8 मे ‘पश्चात’ की जगह ‘पश्चात्’ होगा। प्रश्न 11 के समस्त उत्तर-विकल्प मे पूर्ण विरामचिह्न लगेगा। प्रश्न 16 मे ‘प्रमाणिकता’ और ‘पुर्णिमा’ की जगह ‘प्रामाणिकता’ और ‘पूर्णिमा’ शब्द होँगे। प्रश्न 26 मे ‘सारतत्व’ की जगह ‘सारतत्त्व’ होगा। प्रश्न 42 मे ‘सादा कारावास’ के स्थान पर ‘सामान्य/साधारण कारावास’ होगा। प्रश्न 45 मे ‘मोटरसाईकिल’ की जगह ‘मोटरसाइकिल’ होगा। प्रश्न 50 मे ‘दोनो पक्षकारान’ की जगह ‘दोनो पक्षकारोँ’ होगा। प्रश्न 61 मे ‘प्राईवेट’ और ‘अजमानतीय’ की जगह ‘प्राइवेट’ और ‘ग़ैर-ज़मानती’ होगा। प्रश्न 63 मे ‘तीस दिन’ की जगह ‘तीस दिनो’ होगा।