क्या चाहते हैं, देश की सरकार चलानेवाले?

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

0 निजता का हनन्।
0 देश का प्रत्येक नागरिक असुरक्षित।
0 देश की संरक्षा-सुरक्षा के स्थान घृणित प्रतिशोध की नीति अपनाती सरकार।
0 देश का प्रधानमन्त्री आत्म प्रदर्शन करने में तल्लीन।
0 कॉरपोरेट घराने और तथाकथित उद्योगपतियों के हाथों में खेल रही सरकार।
0 देश के नागरिकों के ‘करों’ से अर्जित आय का खुला दुरुपयोग।
0 लचर स्वास्थ्य-व्यवस्था; स्वास्थ्य-चिकित्सा बहुत महँगी।
0 कुपोषण चरम पर; शिशुमृत्युदर में अत्यधिक वृद्धि।
0 शिक्षा-दीक्षा-परीक्षा-नौकरी बहुत महँगी।
0 एन० जी० ओ०, दलाल तथा रिश्वतख़ोर देश के राजस्व में सेंध लगाते हुए।
0 कृषकवर्ग का मानमर्दन।
0 शिक्षा-प्रशिक्षा की व्यवस्था कुपात्रों के हाथों में।
0 शिशु से लेकर वृद्धा का स्वाभिमान-क्षरण, चीरहरण तथा नृशंस हत्या।
0 सैनिकों की आयेदिन निर्मम हत्या।
0 महँगाई आसमान पर।
0 अत्याचार-अनाचार-कदाचार-पापाचार-भ्रष्टाचार-यौन बलात्कार-व्यभिचार पर कोई नियन्त्रण नहीं।
0 पेट्रोल-डीज़ल-रसोई गैस के दामों में मनचाही बढ़ोत्तरी
0 महिला-पुरुष-स्वाभिमान की बलि चढ़ाती सरकारें।
0 बेरोज़गारी चरम पर।
0 आहार-विहार महँगे।
0 दैनिक उपयोग की वस्तुएँ महँगी।
0 अपहरण, हत्या, आत्महत्या, लुच्चई-लफंगई चरम पर।
0 सुपात्रों के स्थान पर कुपात्रों की पद-प्रतिष्ठा।
0 मनमाने तरीक़े से देश के नागरिकों के आयकर पर राजनेताओं का डाका।
0 आम जनता को कंगाली की ओर ले जानेवाली केन्द्र-राज्य-सरकारों की आर्थिक नीतियाँ।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ सितम्बर, २०१९ ईसवी)

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