इलाहाबाद में बरखा रानी का ताण्डव!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

इस समय अकस्मात् बरखा रानी अपने लाव-लश्कर— आँधी-पानी-बादल-बिजली-सहित– इलाहाबाद में धमक चुकी हैं और तड़़क-गरज के साथ इलाहाबाद को दहला रही हैं। वह इस समय इलाहाबाद के ‘गड्ढा हाऊस’ में पूरी ठसक के साथ ठहरी हुई हैं। उनके बिना किसी पूर्व-सूचना के अचानक धमक आने से इलाहाबाद-ज़िलाप्रशासन, नगरनिगम, सेतुनिगम, पी० डब्ल्यू० डी० तथा वर्षों से उत्तरप्रदेश को गड्डामुक्त करने की मिथ्या घोषणा करनेवालों के ५६ इंच का सीना सिकुड़कर ‘६ इंच’ का हो गया है।

हमारे विश्वसनीय स्रोतों से ज्ञात हुआ है कि क्षोभ और आक्रोश के अन्दाज़ में बरखा रानी ने अपने सभी कर्मचारियों को सख़्त आदेश करते हुए, कहा है— इलाहाबादनिवासियों का जीना दूभर कर दो; इलाहाबाद की सभी घरों, सड़कों, गलियों इत्यादिक के गड्ढों पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लो; आने-जानेवालों को इतना त्रस्त कर दो कि पानी माँगने लगें, फिर हमारे प्रकोप के सम्मुख किसी का दुस्साहस न हो कि ‘एक चम्मच’ पानी लेकर अपने घर से आ जाये। इतना ही नहीं, जितने ‘रोगी’, ‘भोगी’, ‘ढोंगी’ हैं, उन सभी के चेहरे पर ‘बारह बजा’ दो।
वहीं यह भी ज्ञात हुआ है कि बरखा रानी ने अपने मुख्य सिपहसालार ‘अँधेरा राजा’ को ‘अँधेरा क़ायम रहे’ अभियान के अन्तर्गत सर्वत्र अपने पैर पसारे रखने का हुक़्म तामिल कर दिया है। उन्होंने चेतावनी के स्वर में उत्तरप्रदेश में क़ाबिज़ ढोंगियों को यह बता दिया है कि जिस तरह से महाराष्ट्र के मन्त्रियों के गढ़ में घुसकर पसीना छुड़ा दिया गया है, उसी तरह से, ख़ासतौर से बनारस, गोरखपुर और लखनऊ में भी उस घटना की पुन: आवृत्ति हो सकती है।

यह भी ज्ञात हुआ है कि उत्तरप्रदेश के भोगी-सम्प्रदाय के रोगियों को भी बरखा रानी बख़्शने के ‘मूड’ में नहीं दिख रही हैं।

समाचार लिखे जाने तक ‘बरखा रानी’ आपात् बैठक में व्यस्त रहीं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ११ जुलाई, २०१८ ईसवी)

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