पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि में रक्षा बंधन : महेन्द्र नाथ महर्षि

रक्षा बंधन-१५ अगस्त,२०१९
सभी बहनों को धन्यवाद !

से॰नि॰ अधि॰ दूरदर्शन महेन्द्र नाथ महर्षि

इस पर्व के दो मुख्य पक्ष हैं। एक पौराणिक और दूसरा ऐतिहासिक। पौराणिक में पहला कृष्ण का युधिष्ठिर को दिया वह संदेश जिसमें उन्हें प्रजापालक होने के स्वरूप में ब्राह्मण पुरोहित से तीन कच्चे सूत केधागे कलाई पर बँधवा कर , यह कभी विस्मृत न होने देना कि उन्हें अपने पूरे राज्य , उसके निवासियों/सभी अन्य प्राणियों की रक्षा करनी है।

दूसरी कथा इंद्राणी-देवता इंद्र से जुड़ी है। देवगणों की असुरों के आतंक से रक्षा करने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व राजा इंद्र को याद रहे , इसका बोध सदैव ताज़ा रखने के लिए इंद्राणी ने सूत के धागों से सदा बँधे रहने का वचन लिया।

भारतीय समाज में राजा द्वारा प्रजा की रक्षा करने का यही पौराणिक संदर्भ, पर्व रूप में चला आ रहा है। लेकिन यह राजा-प्रजा के उत्तरदायित्व के साथ काल अंतर में यह वंश तक में , गहरे पैठ गया। इस तरह इसने समाज को वर्गों में बँटे रहते भी परंपरा रूप में संगठित कर लिया। सुखद् पक्ष यह रहा है कि इसे मनाने का कोई सामाजिक प्रतिबंध किसी भी वर्ण विशेष पर कभी नहीं लगा।

इसी रक्षाबंधन की महत्वपूर्ण ख्याति ने धर्म-बंधन से मीलों दूर निकल कर भाई बहिन के आपसी भरोसे और इस कच्चे धागे के महत्व को उस समय नया आयाम दिया जब रानी कर्मावती ने अपनी सहायता के लिए तीन सूत के धागे हुमायूँ को भेजे और इन तीन धागों का सम्मान करने वाले उस विशाल हृदय भाई ने बहन का मान और राजपूती परंपरा का भरपूर आदर किया। यह ऐतिहासिक तथ्य, मुग़ल क़ालीन भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम पन्ना है।

हम आज संयोग से राष्ट्रीय स्वतंत्रता पर्व , १५ अगस्त और सावन की इस पूर्णिमा को पड़ने वाले रक्षा बंधन को पौराणिक युग से लेकर आज तक चली आ रही प्राचीन परंपरा का निर्वाह उसी तरह किए हुए हैं , जिस तरह युधिष्ठिर-कृष्ण , इंद्राणी-इन्द्र और हुमायूँ-कर्मावती ने युग और संदर्भ विशेष में किया था।

इस पूरी परंपरा में शुद्ध सूत के कच्चे धागे का क्या संदर्भ है इसका कोई कारण ज़रूर रहा होगा। मेरा निजी विश्लेषण यह है कि वचन का महत्व एक बार की ‘हां’ से जुड़ा वह पवित्र सम्बन्ध है जो मिट जाने पर भी अटूट रहता है। कच्चा धागा मानवीय उँगलियों से काता गया वह सूती ‘सूत्र’है जो कपास की धवल रूई में परिलक्षित , पूरी तरह शुद्ध भावनाओं से बुना होता है। प्रदूषण की उसमें कोई जगह ही नहीं हो सकती।

अंत में क्षमा चाहूँगा अगर तथ्यों में कोई चूक हो गई हो। सुधार के लिए सुझाव का स्वागत करूँगा।

स्वतंत्रता के तिहत्तरवें 15 अगस्त 2019 और श्रावण शुक्ल पक्ष की इस पूर्णिमा पर रक्षा बंधन की मंगल कामनाएँ।
——–महेन्द्रमहर्षि

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