सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

संघ और सियासत

जहाँ सामान्य लोगों की समझ की सीमा समाप्त होती है वहां से एक स्वयंसेवक सोचना प्रारम्भ करता है।

Mayank Vaish (RSS activist)-

कल शाम को एक भाईसाहब मिले। मुझे रोकते हुए बोलते हैं…… की आजकल आप संघ वालों की जमकर चांदी है। हर जगह CM आपके , PM आपका , मंत्री आपके……खैर मेने मुस्कुराते हुए सुनकर भी उनकी बात को टाल दिया। लेकिन सोचने वाली बात है,,,,,,,हर्ष हमे भी होता है जब एक स्वयंसेवक देश की कोई जिम्मेदारी का निर्वहन करता है….उसका दायित्व संभालता है। लेकिन हम सामान्य लोगों का एक सामान्य स्वभाव है,,,,कि हम किसी भी व्यक्ति की सफलता देखते हैं।
और उसके संघर्षों को अनदेखा कर देते हैं।

आज सबको #मोदी जी का , #योगी जी का युवाओं में क्रेज दीखता है,,,लेकिन उनकी तपस्या , उनका त्याग , उनका समर्पण भी देखना चाहिए। पर्रिकर जी , देवेंद्र जी , रघुवर जी , खट्टर जी की सादगी भी देखनी चाहिए,,,,,किस तरह पर्रिकर जी देश के सबसे ज्यादा शो ऑफ करने वाले ,,,,VVIP लोगों के पसंदीदा राज्य के मुखिया होकर भी सादगी और गरिमा पूर्ण ढंग से रहते हैं।। दूसरी ओर आज हम देखते हैं कुछ छुट भैय्ये नेताओं को अगर वो किसी शहर के पार्षद भी बन जाएं तो 4 पहिया वाहन चलते हैं। यह अंतर है,,,,इन नामों और हम सामान्य लोगों में। आप को मोदीजी की सफलता दिखती है,,,,लेकिन दूसरा पहलू भी तो देखिए,,,,, आज उनके समकक्ष जो दो विरोधी राजनेता हैं,,,युवराज और डेल्ही cm जितनी इन दोनों की आयु है,,,,, उससे ज्यादा समय से मोदीजी इस देश , समाज के लिए काम कर रहे हैं।। जब हमारे बच्चे 12th के बाद किस कॉलेज में प्रवेश लें इस कशमकश में फंसे होते हैं,,,,,उस आयु में इन लोगों ने देश और समाज के लिए अपना घर-परिवार छोड़ने का निर्णय ले लिया था।।

हम इन जैसे बनना चाहते हैं,,,,लेकिन क्या उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं ? मुझे याद है,,,,आज से 5-10 साल पहले अगर आप कुर्ता पहन लें तो हमारे दोस्त मजाक उड़ाते थे,,,,क्योकि इसे बूढ़ों का पहनावा कहा जाता था,,,,लेकिन आज युवा इसे गर्व से पहनते हैं।।
कल तक आप गले में माला पहनकर स्कूल , कालेज नही जा पाते थे,,,क्योकि आपको बैकवर्ड सोच का कह दिया जाता था,,,,,लेकिन आज जब देश का मुखिया ” रुद्राक्ष माल ” गले में धारण करता है……..तो उसको देखकर लाखों युवा माला पहनते हैं।।
मुझे याद है,,,,अभी कुछ समय पूर्व तक आप अगर युवा हो तो गले में तौलिया डालते हुए शरमाते थे,,,,

लेकिन जब देश का प्रधान गले में भगवा गमछा डालता है,,,तो आज उसको फॉलो करते हुए करोड़ों युवा भगवा तौलिया गले में डालते हैं।
आज आप नजदीकी बाजार चले जाइए,,,इस वर्ष भगवा गमछों की भरमार है।।

और आपको एक विशेष बात बता दूं, जहाँ सामान्य लोगों की समझ की सीमा समाप्त होती है वहां से एक स्वयंसेवक सोचना प्रारम्भ करता है। तो आपजो बता दूँ…………. आज_आप_जो_सादा_जीवन_जीने_वाले_CM_देख_रहे_हैं_न ,,,,वह_भविष्य_की_तैयारी_है
आप दुनिया में संचार_क्रांति देख चुके हैं….. आप दुनिया में सत्ता परिवर्तन की क्रांति देख चुके हैं…… आप योग क्रांति देख चुके हैं…….लेकिन अब “चरित्र क्रांति ” आने वाली है,,,,,और संसार के सभी विशेषज्ञ इसे स्वीकार रहे हैं। मुझे और हर भारतीय को उस दिन गर्व होगा ,,,,जब योग क्रांति की ही तरह ” चरित्र क्रांति ” की अगुवाई भी भारत ही करेगा। कल तक जिस राजनीति को हम कीचड़ समझते थे,,,,आज वह साफ़ और निर्मल होने जा रही है।
और यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी पीढ़ी उन क्षणों की साक्षी बनेगी।। बात_रही_संघ_की तो संघ के विषय में में भी इतना ही देखा और समझा हूँ, संघ_कुछ_नही_करता और स्वयंसेवक_कुछ_नही_छोड़ता। ”

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