‘रावण’-जैसा ‘शिवभक्त’ आज तक नहीं!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘रावण’-जैसा प्रकाण्ड पण्डित और शिवभक्त कौन था, जो शिव को प्रसन्न कर ‘अमरत्व’ की प्राप्ति करना चाहता था? शिव (आशुतोष) को प्रसन्न करने के लिए वह अपनी ग्रीवा (गरदन) काटकर उनके चरणों पर रख दिया करता था। दुर्धर्ष अतिमानव रावण इतना अहम्मन्य था कि यम, वायु, वरुण, अग्नि आदिक देवगण को बन्धक बना रखा था। वह चाहता था :– सम्पूर्ण देवलोक में मेरा ‘आधिपत्य’ बना रहे। मैं सशरीर स्वर्ग का आरोहण करूँगा; परन्तु हुआ क्या, मदान्ध-सत्तान्ध रावण (रुलानेवाला) का सृष्टिविधान के साथ बलप्रयोग करना, उसके सर्वनाश का कारण बना था।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ मई, २०१९ ईसवी)

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