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एक ही दिन नहीं, रोज हो महिलाओं का सम्मान : प्राची अधिकारी

आदित्य त्रिपाठी (प्रबन्ध सम्पादक)-


 खास बातचीत के दौरान अदाकारा प्राची अधिकारी ने कहा की ह्रदय से होना चाहिए महिलाओं का सम्मान


सुलतानपुर – अभी हाल में हमलोगों ने महिला दिवस मनाया , जगह जगह महिलाओं का सम्मान हुआ। मेरे पास भी बहुत लोगों के फोन आए, सोशल साइट्स पर लाखों लोगों ने बधाइयाँ दीं, कई कार्यक्रमों में गए जहाँ लोगों ने बड़ा सम्मान किया, सबसे अच्छी बात यह रही की मुझे मंच पर विभिन्न क्षेत्रों में अग्रड़ी भूमिका अदा करने वाली महिलाओं से बातचीत करने का अवसर मिला और कई कार्यक्रमों में निमंत्रण के बाद भी नहीं जा सके। महिला दिवस पर बहुत व्यस्तता हो गयी। यह बातें खास बातचीत के दौरान मशहूर अदाकारा और सामाजिक कार्यकत्री प्राची अधिकारी ने विशेष बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा की देश में महिला दिवस बहुत अच्छे ढंग से मनाया गया। पर एक सवाल उठता है की क्या महिलाओं का सम्मान महिला दिवस के ही दिन होना चाहिए, मंच पर बुलाकर उत्कृश्ट काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित कर देने से महिलाशसक्तीकरण हो जायेगा? रोज गांव की गलियों में टूटते लड़कियों के सपनो को कौन संजोयेगा, समाज की गन्दी आँखों से उन्हें कौन उभारेगा। ऐसी लड़कियों को आगे निकलने की वास्तविक शुरुआत कैसे होगी। उन्होंने कहा की आज हम कामयाब है, मैंने जीतोड़ मेहनत की है। मुझसे तो लोग अक्सर जुड़ना चाहते हैं पर वास्तव में महिलाशसक्तीकरण तो तब होगा जब रोज महिलाओं का सम्मान होगा और वो सम्मान ह्रदय से उठना चाहिए।


अदाकारा से सोशल एक्टिविस्ट का सफ़र


सुलतानपुर ~ प्राची अधिकारी ने कहा की अदाकारा से सोशल एक्टिविस्ट तक का सफ़र बहुत खाश रहा। पहले तो ज्यादा सप्पोर्ट नहीं मिला पर धीरे धीरे कामयाबी मिलने लगी तो लोगों ने सहयोग देना शुरू किया । अबतक साऊथ इंडियन लगभग एक दर्जन फ़िल्में रिलीज हो चुकी हैं । आधा दर्जन फ़िल्में रिलीज होने को तैयार हैं। साथ ही घूमने का मौका मिला तो आम आदमी के जीवन की कठिनाइयों को देख खुद ब खुद सोशल एक्टिविटी की तरफ रुझान हो गया अब कई बड़ी कंपेन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। लोग सामाजिक कार्यकर्त्ता बोलने लगे।


जन्मदिन पर कुछ देना चाहते हैं


सुलतानपुर ~ प्राची अधिकारी अपने जन्मदिवस पर 16 मार्च को नई पहल करना चाहती हैं। उनका मानना है कि जन्मदिन इस बात का सूचक है की मरना एक साल घट गया है। अब और सजगता से काम करने की जरुरत है। हम तो जन्मदिन पर साल भर के काम की समीक्षा करेंगे। अगले साल की योजना बनाएंगे। मेरे जीवन का सपना है बुंदेलखंड में नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे लोगों के जीवन स्तर में परिवर्तन हो और उसके लिए हर संभव प्रयत्न करना। इस साल मैं बुंदेलखंड में मूवमेंट अपने जन्मदिवस पर शुरू कर दूंगी।