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रिटायर्ड टीचर्स को मिले उपलब्धियों के अंकन वाले प्रमाणपत्र

अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥
(तृतीय अध्याय, श्लोक 21)

अर्थात्, श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण और काम करते हैं, दूसरे भी वैसा ही आचरण और काम करने को प्रेरित होते हैं। श्रेष्ठ पुरुष जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त समुदाय उसका अनुसरण करने लगते हैं।

बीआरसी भरखनी पर सेवानिवृत्त हुए 19 अध्यापकों को एक समारोह में जिस तरह सम्मानित किया गया, तो श्रीमद्भगवत गीता का उपरोक्त श्लोक समीचीन लगा। तब और, जब रिटायर्ड टीचर्स को श्रीमद्भगवत गीता भेंट की गई। गीता ही नहीं, इन टीचर्स को शॉल और मिष्ठान्न के साथ प्रदान किया गया ऐसा प्रमाणपत्र, जिसमे अंकित रहीं उनके सेवाकाल की तमाम उपलब्धियां, जो टीचर्स के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकतीं हैं।

सेवानिवृत्त शिक्षकों वेदप्रकाश, जमुना लाल, रामलखन, रामपाल सिंह, चन्द्रपाल, रामनिवास बाजपेयी, रघुनाथ, घनश्याम त्रिवेदी, आनन्द देव, उर्मिला देवी, सुशीला देवी, आशा मिश्रा, मुनेश कुमार पाण्डेय, रामौतार दिवाकर, महिपाल सिंह, चन्दन सिंह, बाबूराम, अनिल कुमार और कृष्णपाल सिंह को साथी टीचर्स ने भावभीनी विदाई के साथ उनके स्वस्थ जीवन की कामना की।

खण्ड शिक्षा अधिकारी पवन द्विवेदी ने सेवानिवृत्त टीचर्स को सम्मानित किया। उन्होंने सभी के सेवाकाल और बेसिक शिक्षा में योगदान की सराहना की। इस मौके पर एबीआरसी संजय त्रिवेदी, स्कंदवीर सिंह चौहान व उदयवीर सिंह, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के ब्लाक अध्यक्ष अश्वनी मिश्रा राजू, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, संकुल प्रभारी डॉ0 शिवानंद बाजपेयी सहित बड़ी संख्या में अध्यापक और अध्यापिकाएं मौजूद रहे। कार्यक्रम संचालन प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रान्तीय मंत्री गिरीश दीक्षित ने किया।