खूनी हैं हरदोई की सड़कें, एक साल में निगल गयीं 414 की जान

सड़क हादसों में नही लग रही लगाम, सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक अधिक मौतें

मनोज तिवारी


-जिले भर में एक साल में हुए 775 सड़क हादसे
-हादसों में घायलों की संख्या भी 373
-सामान्य अवस्था मे करीब 1 हजार से अधिक लोग घायल
-हादसों से बचने के लिए पुलिस के द्वारा हर रोज लोगों को दी जा रही समझाईश मोटरव्हीकल एक्ट की हो रही कार्रवाई
-पुलिस की आवाज नक्कार खानों में तूती की आवाज बनकर दबी 

               हरदोई- यूपी का हरदोई एक जिला ऐसा है जहां सड़कें खूनी है।कारण एक साल में यहां की खूनी सड़कें जिले के 414 लोगों को निगल चुकी है। फर्राटा भर दौड़ते वाहनों की चपेट में आने से यह हादसे हुए हैं।और इन हादसों में 373 गम्भीर रूप से घायल हुए है जबकि 1 हजार से अधिक लोग आंशिक चुटहिल हुए है।यह आंकड़े चौकाने वाले है और सचेत कर रहे है कि यातायात नियमों को मानो।
               जिले में लगातार सड़क हादसे में इजाफा हो रहा है। इन हादसों से बचने के लिए पुलिस के द्वारा हर रोज लोगों को समझाईश दी जा रही है। सड़कों पर हर रोज मोटरव्हीकल एक्ट की कार्रवाई कर लोगों को समझाया जा रहा। दबाव बनाया जा रहा। ताकि लोग समझें और नियम के तहत वाहन चलाएं। लेकिन, पुलिस की आवाज नक्कार खानों में तूती की आवाज बनकर रह जा रही है। लाख कोशिशों के बावजूद लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
              पुलिस से मिले ताजा आंकड़ों में हाईवे की बजाए ग्रामीण अंचल की सड़कों पर सड़क हादसे अधिक हो रहे हैं। कारण चाहे ग्रामीण अंचल की बदहाल सड़कें हो या फिर शराब के कारण। वहीं ग्रामीण अंचल के लोग शराब की नशे में फर्राटे मारते हैं। नतीजतन उन्हें मौत के आगोश में समाना पड़ता है। ताजा आंकड़े के अनुसार साल भर में जिले की खूनी सड़कों पर 414 लोगों की जान चली गई है। आजकल लोग शराब की नशे में तेज रफ्तार में वाहन चला रहे हैं और असमय काल के गाल में समा रहे हैं।आंकड़ों में मौतों के अलावा 775 वह सड़क हादसे है जिनमे 373 लोग गंभीर जख्मी हुए।जबकि अगर देखा जाए तो करीब 1 हजार से अधिक लोग घायल हुए है जिनको सामान्य चोटें आई है। सबसे अधिक ग्रामीण अंचलों की सपाट रोड में लोग जान गवां चुके हैं।

सुबह 8 से रात 8 बजे तक अधिक मौतें

अब अगर माना जाए तो देखा जा रहा है कि सड़क हादसे में मौत 12 घंटे के भीतर हुई है। वह भी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के आसपास।यानी कहा जा सकता है कि सड़कों पर वाहनों का दबाव इन्हीं समयों के बीच होती है। इसके अलावा शाम 4 बजे से रात रात बजे के बीच अधिकतर यह देखा गया है कि इस दौरान अंगूर की बेटी का खुमार भी सिर चढ़कर बोलता है। आखिरकार हादसे की संभावना बढ़ जाती है।


हादसे से बचने के लिए यह करें

– शराब पीकर वाहन न चलाएं

– वाहन पर तीन सवारी न बैठें
– वाहनों के कागजात साथ लेकर चलें
– प्लेट पर नंबर साफ सुथरे अक्षरों में लिखें
– हेलमेट का उपयोग करें 
– कम उम्र के लोगों के हाथ वाहन न सौपें 
– भारी वाहनों का ओवरटेक न करें
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