इंडियन वॉयस 24 परिवार की ओर से लाला लाजपत राय जी को विनम्र श्रंद्धाजलि

आदित्य त्रिपाठी- प्रबन्ध सम्पादक …..indianvoice24.com…..

आदित्य त्रिपाठी “यादवेन्द्र”- 


लाला लाजपत राय जी का जन्म 28 जनवरी 1865 को अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ था । लाला लाजपत राय जी भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे । लाला जी पंजाब केसरी के नाम से जाने जाते हैं । पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना लाला लाजपत राय जी के द्वारा की गयी थी ।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक लाला लाजपत राय जी भी थे । विश्व भर में फैली अँग्रेज़ी हुकूमत को ललकारने वाले, असंख्य युवाओं के हृदय में स्वाधीनता की अलख जगाने वाले लाला लाजपत राय भारत की स्वाधीनता के इतिहास में सदा अमर रहेंगे । अपना जीवन भारत माता के चरणों में न्यौछावर कर देने वाले ऐसे सपूत ही हमारे राष्ट्रीय जीवन के प्राण हैं।

पूर्ण स्वराज की माँग करने वालों में बालगंगाधर तिलक के साथ लाला जी भी थे । पूर्ण स्वराज की माँग के बाद लाला जी के साथ समूचा देश खड़ा हो गया था । लाजपत जी ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ मिलकर आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाने का काम भी बखूबी किया ।  1928 में साइमन कमीशन के विरोध – प्रदर्शन के दौरान हुए लाठी – चार्ज में बुरी तरह से घायल होने के कारण 17 नवम्बर सन् 1928 को इनके शरीर का आत्मा से विलगाव हो गया । घायल होने के पश्चात लाला जी ने अंग्रेज़ों से कहा था कि “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।” पंजाबकेसरी की बात तब सही साबित हुई जब उद्वेलित क्रान्तिकारियों ने हत्या का बदला लेने के चलते ही 17 दिसम्बर 1928 को चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव के नेतृत्व में ब्रिटिश पुलिस के अफ़सर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया था । लाला लाजपत राय ने हिन्दी में श्रीकृष्ण और शिवाजी के साथ कई महापुरुषों की जीवनियाँ भी लिखीं । पंजाब में हिन्दी के प्रचार – प्रसार में लाला जी का अतुलनीय सहयोग रहा । पूरे भारत में हिन्दी लागू करने के लिये लाला लाजपत राय जी ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था ।

इंडियन वॉयस 24 परिवार लाला लाजपत राय जी को विनम्र श्रद्धाञ्जलि अर्पित करता है । नमन करते हुए हृदय से उनका आभार व्यक्त करता है क्योंकि आज लाला जी जैसे देवपुरुषों के कारण ही हम सब आजाद भारत में स्वेच्छा से जी पा रहे हैं ।

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