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राष्ट्रीय एकता सामाजिक सद्भाव के वितान तले ही सुरक्षित है : अवध क्षेत्र प्रान्त प्रचारक श्री कौशल जी

जिस समाज में किसी मानव या समाज का किसी मानव या समाज द्वारा जाति या वर्ण के आधार पर शोषण हो वह सर्वथा त्याज्य है : पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री खेमकरन

आदित्य त्रिपाठी/नीलकण्ठ मणि पुजारी (सम्पादक गण indianvoice24 न्यूज़)-


राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क विभाग द्वारा आयोजित सामाजिक समरसता का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य विषयक संगोष्ठी में अवध क्षेत्र के प्रान्त प्रचारक श्री कौशल जी ने कहा कि सामाजिक समरसता भारत की पहचान है । विविधता में एकता का भाव ही देश को सुदृढ़ बनाता है । ऐतिहासिक दृष्टि से देखने पर यह पता चलता है कि आक्रान्ताओं द्वारा विद्वेष और विखण्ड़न पैदा करने पर भी समाज किसी न किसी भाँति एक ही सूत्र से बंधा रहा है ।  वर्तमान परिदृश्य यह बताता है कि आज हम जाति, पंथ, सम्प्रदाय आदि से ऊपर उठकर देश हित में सोच रहे हैं । इसी कारण भारत पुनः विश्व में विशिष्ट स्थान बनाने में सफल हुआ है । उन्होंने कहा संघ सभी समुदायों जैसे वनवासी, गिरिवासी, दलित, वंचित आदि के मध्य अपनी पहुँच बनाने में कामयाब रहा है । छुआछूत और भेदभाव को पीछे छोड़ संघ आज जन अभिलाषाओं का केन्द्र बन गया है । वास्तव में राष्ट्रीय एकता सामाजिक सद्भाव के वितान तले ही सुरक्षित है ।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री खेमकरन जी ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर देश की बहु आयामी उन्नति के लिए सामाजिक समरसता पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता एक सामाजिक अभिशाप है । जिस समाज में किसी मानव या समाज का किसी मानव या समाज द्वारा जाति या वर्ण के आधार पर शोषण हो वह सर्वथा त्याज्य है । बाबा साहब अम्बेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज की विषमताओं से ल़ड़ते हुए कभी हार नहीं मानी । सामाजिक समरसता का प्रश्न बड़ा अवश्य है किन्तु अब हल होने की ओर अग्रसारित है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस. पी. सिंह ने गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुे कहा कि हम जातीय श्रेष्ठता को त्याग कर सर्वसमाज को साथ लेकर चलें । भारतीय समाज के समतावादी दर्शन का ध्यान रखते और उसे सम्मान देते हुए इस दिशा में तर्क – वितर्कों से ऊपर उठकर कार्य करें । 

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रान्त सम्पर्क प्रमुख डॉ. जयवीर सिंह जी ने बताया कि सम्पर्क विभाग अनवरत रूप से वर्तमान प्रासांगिक विषयों पर संगोष्ठियां आयोजित करता रहा है । महानगरों में भी ड्राइंग रूम परिचर्चा की शुरुआत हो गयी है । इससे प्रभावित होकर विभिन्न मतों और पंथों के लोग संघ के सम्पर्क में आ रहे हैं । प्रारम्भिक परिचय और प्रस्तावना समाजकार्य विभाग में कार्यरत डॉ. राकेश द्विवेदी द्वारा किया गया । हिन्दी विभाग की प्रो. अल्का पाण्डेय ने सभी का आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक श्री शिवनारायण जी, सुरेश जी, विनोद जी आदि के साथ ही इस कार्यक्रम में शिक्षाविद्, चिकित्सक, इंजीनियर, व्यवसायी एवं अन्य क्षेत्रों के गममान्य लोग उपस्थित रहे ।