रामलला श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में मन्दिर हेतु हुआ भूमि पूजन

‘रिश्वतख़ोरी’ और ‘दलाली’ हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘मुण्डकोपनिषद्’ से लिया गया राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ”सत्यमेव जयते” को निरस्त कर, देश के समस्त निजी, शासकीय-अर्द्ध-शासकीय कार्यालयों, प्रतिष्ठानों, साहित्यिक संस्थानों, अधिष्ठानों, परिषदों, समितियों, मण्डियों, मन्त्रालयों, न्यायालयों, संसद्, विधानमण्डल, विधान परिषद्, विधानसभा-भवन, तहसीलों, कचहरी, शिक्षाकेन्द्र, परीक्षा-आयोग-कार्यालयों के मुख्य प्रवेश-द्वारों, पुलिस-केन्द्रों, चिकित्सालयों के ठीक सामने, बाबुओं, अधिकारियों, सांसदों, विधायकों, महापौरों, पार्षदों, ग्रामप्रधानों, ब्लॉक-अधिकारियों, टाऊन एरिया चेअरमैनों, मन्त्रियों, प्रधानमन्त्री, राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्यमन्त्रियों तथा राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, अधिवक्तागण, कुलपति, प्रधानाचार्य, अध्यापकवृन्द आदिक के कक्षों के आगे और पीछे, उनके वाहनों, चौराहों, प्रवासों, आवासों तथा निवासों पर यह सर्वव्याप्त अभिनव ‘राष्ट्रीय वाक्य’ भगवा रंग में अब अंकित करने का आदेश निर्गत कर दिया जाना चाहिए :– ”रिश्वतख़ोरी और दलाली हमारा जन्म-सिद्ध अधिकार है ।”

उपर्युक्त सभी पदाधिकारियों और कार्यालय-पालकों को इस बात की अच्छी समझ है कि भारत का ‘एक चपरासी से लेकर शीर्षस्थ अधिकारी तक’ सत्तासंचालक पथभ्रष्ट, कर्त्तव्यच्युत तथा निष्ठारहित हैं; क्योंकि वह व्यक्ति सर्वाधिक भ्रष्ट, पापाचारी तथा अपराधी होता है, जो जानता-समझता तथा देखता रहता है कि कहाँ-कहाँ रिश्वतख़ोरी और दलाली हो रही है, बावुजूद वह मौन बना रहता है, जबकि उन कुकृत्यों-दुष्कृत्यों पर नियन्त्रण करना, उस व्यक्ति की सामर्थ्य के अन्तर्गत रहता है। यही कारण है कि ऐसे व्यक्ति के आचरण से आज भारत नैतिकता के उस चरम क्षरण की ओर पतनोन्मुख है, जहाँ से मानव-सभ्यता पग-पग पर पराजित होती हुई दिख रही है।

इसके लिए देश की राजनीति पूरी तरह से उत्तरदायी है। वर्तमान परिदृश्य में ‘नेता’ शब्द ‘अनिर्वचनीय अश्लील’ शब्द बन चुका है। यह शब्द अब अपराध-जगत् के अन्तर्गत अपराध के समस्त प्रकारों, भेदों तथा उपभेदों को स्वयं में समेटे हुए है। सूक्ष्म दृष्टि-निक्षेपण इस तथ्य की पुष्टि करता है कि राजनीति की वाटिका में तरह-तरह के पापी पौधों का रोपण-प्रतिरोपण प्रतिपल किया जा रहा है और जो प्रतिक्षण जवान होकर जनसामान्य के प्रगतिमार्ग पर अवरोध, व्यतिक्रम तथा व्यवधान के रूप में खड़े हो चुके हैं।
देश की जनता स्वयं को पहले कर्त्तव्यनिष्ठ बनाये, फिर ‘आग’ बनकर भ्रष्टाचारियों को लीलने के लिए तत्पर हो जाये, एकमात्र विकल्प दिख रहा है।

सम्पर्क– 9919023870

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