सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

योगी की जाति

प्रेमकुमार मणि-


योगी आदित्यनाथ उर्फ़ अजय सिंह उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे .कल शपथग्रहण होगा . 11 जनवरी से ही नाना प्रकार के कयास लगाए जा रहे थे .नाम से ज्यादा मुख्यमंत्री के जात की चिंता लोगों को थी . आ गए योगी . लेकिन हमारे यहाँ योगियों की कौन कहे भगवानो की भी जात होती है . कबीर माथा कूटते रह गए ‘ जात न पूछो साधु की ‘ .लेकिन मानता कौन है . आप साधु हों ,योगी हों , ईश्वर हों – कुछ भी हों ,जात जरुरी है . यहाँ मुर्दे की जात होती है . कायदे से योगी की जात नहीं होनी चाहिए . लेकिन उनके माँ -बाप की जात तो होगी !
मुख्यमंत्री चुनाव में राजनीति चली तो केशव मौर्य की . पौराणिक कृष्ण का एक नाम केशव भी है . चंद्रगुप्त मौर्य में जो चंद्रगुप्त है ,उसे भी कृष्ण से जोड़ा जाता है . केशव को चुनाव के बाद उम्मीद थी कि उन्हें सी एम बनाया जाएगा . लेकिन पॉलिटिक्स में लॉबी और मीडिया उनके साथ नहीं था . मोदी किसी पपेट को सी एम बनाना चाहते थे . जानकारी मिलने पर केशव गश खा गए . अस्पताल में भर्ती हुए . जान बची तो पुरखों का ख्याल किया होगा . ताल ठोक कर खड़े हो गए . योगी से संपर्क साधा और मोदी के उम्मीदवार के खिलाफ हल्ला बोल दिया . बाज़ी केशव के हाथ रही . मोदी हार गए .
5जनवरी 1972 को गढ़वाल में जन्मे योगी का जन्म नाम अजय सिंह है . साधु की जात नहीं होती . उ प्र को एक निर्जात मुख्यमंत्री मिला है . उनकी कट्टरता से लोगों का डरना स्वाभाविक है . प्रेमचंद की एक बात का भरोसा है कि उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा संकुचित विचारों का उद्धारक होता है .