संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

अभिव्यक्ति के दंश

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
कृष्ण-कृष्ण हैं रट रहे, कर्महीन जो लोग।
पापकर्म में रत रहे, मौन दिखे संयोग!
दो–
अनाचार है पक रहा, कदाचार के धाम।
पापी छक्-छक् चूसते, मानो फल हो आम।।
तीन–
धरा-धाम में दिख रहे, बढ़कर एक प्रवीन।
शोध कर रहे जगत् पर, दिखते नहीं नवीन।।
चार–
रूप-रंग अरु रूपसी, हैं चाहत के नाम।
हैं पीते आकण्ठ रस, बम-बम जय श्री राम।।
पाँच–
सदाचार की बात क्यों, पापी! नख-शिख देख!
कितना किया अधर्म तू! मिटा सकेगा रेख?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३१ अगस्त, २०२१ ईसवी।)