ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

हाँ, साहेब! यही चुनाव है

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

साहेब! यही चुनाव है।
चुनावी मौसम है, दलदल में अब पाँव हैं।
हवा का रुख़ नामालूम, दो नावों में पाँव हैं।।
साहेब! यही चुनाव है।
हत्यारे, बलात्कारी, व्यभिचारी चहुँ ओर,
धर्म, जाति, दलितों पर लगा रहे दाँव हैं।
साहेब! यही चुनाव है।
गोटी हिन्दुत्व की अब असमंजस में है पड़ी,
राजनीति-गलियारे में केवल काँव-काँव हैं।
साहेब! यही चुनाव है।
बहन जी का दलित-मोह महज़ दिखावा है,
बना रहा घनचक्कर राजनीति का दाँव है।
साहेब! यही चुनाव है।
नोटबन्दी-घमण्डी-बीच चल रहा सुकुर-पुकुर,
कभी दिखे घाम तो कभी दिखे छाँव है।
साहेब! यही चुनाव है।
आठ डिगरी जाड़े में, पंजा कँपकँपाइ रहा,
खाट खड़ी होय रही, लगि न रहि दाँव है।
साहेब! यही चुनाव है।
मतदाता दबायेंगे, बटन जो मुनासिब हो,
इह बगल-उह बगल चुनावी झाँव-झाँव हैं।
साहेब! यही चुनाव है।
सालों साल दिखे नहीं, गूलर के फूल जैसे,
इनकी बेहयाई देखो, अब पकड़ रहे पाँव हैं।
साहेब! यही चुनाव है।

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