एक्सप्रेस-वे के लिये नीलम नदी क्षेत्र से ली जायेगी मिट्टी, सिल्ट हटने से सूख रही नीलम को मिलेगा बल

हरदोई। कटरी क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेस-वे नीलम नदी के लिये वरदान बनने जा रहा है। सांडी-हरपालपुर मार्ग पर लमकन के निकट 10 किलोमीटर में नदी क्षेत्र से मिट्टी की खोदाई गंगा एक्सेप्रेस-वे के लिए की जाएगी। इसके लिये प्रशासन ने सहमति दे दी है। नदी से सिल्ट हटाने पर नदी की जलधारण शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

नदी के अन्य भाग पर काम मनरेगा मद से ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जाएगा। बारिश की एक-एक बूंद को संग्रहीत और संरक्षित किए जाने और धरती की कोख को लबालब रखने के लिए जलस्रोतों को पुनर्जीवन दिया जा रहा है। इससे बारिश के पानी को जलाशयों में संग्रहीत किया जा सके। इसके लिए यहां पर कटरी क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली नीलम नदी को गंगा एक्सप्रेसवे धार देने जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए मिट्टी की आवश्यकता है और नीलम नदी को पुनर्जीवन दिए जाने के लिए सिल्ट सफाई जरूरी है। 

मुख्य विकास अधिकारी सौम्या गुरूरानी ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जुड़ी कार्यदायी संस्था पीएनसी के प्रतिनिधियों से वार्ता के बाद नीलम नदी से मिट्टी खोदाई की सहमति बनी है। सांडी-हरपालपुर मार्ग पर लमकन पुल से दोनों ओर 5-5 किलोमीटर लंबाई में नीलम नदी से मिट्टी खोदाई गंगा एक्सप्रेसवे के लिए कराई जाएगी, जबकि शेष 52.5 किलोमीटर लंबाई में नीलम नदी में मनरेगा मद से ग्राम पंचायतों के माध्यम से खोदाई कराई जाएगी। इसके लिए सिंचाई विभाग से डीपीआर तैयार कराई जा रही है। नदियों और जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मांगी है। 

सीडीओ सौम्या गुरूरानी ने बताया कि आयुक्त ने नमामि गंगे विभाग को डीपीआर प्राप्त कराने के आदेश दिये हैं। नमामि गंगे विभाग की ओर से डीपीआर को दी जाने वाली स्वीकृति के आधार पर बजट प्राप्त कराया जायेगा। यहां की नदियों और जलाशयों को पुनरुज्जीवित कराए जाने के लिए श्रम रोजगार उपायुक्त के माध्यम से प्रस्ताव और डीपीआर तैयार कराए जा रहे हैं। जल्द ही नमामि गंगे और ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को प्रस्ताव भेजे जायेंगे।