संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

सत्ज्ञान की सरलता

सत्य का ज्ञान सर्वत्र खुला ही हुआ है और यह सत्ज्ञान अनूठा और सर्वथा उपयोगी भी है।
तुम केवल मूर्खतावश या धूर्ततावश ही उससे दूर भागते हो।

सबको ज्ञात ही है कि संसार में एक ही अनेक हुआ जा रहा है।
एक बीज ही वृक्ष बनकर अनेक बीज हुआ जा रहा है।
अतः अनेक में वह एक ही विस्तृत हुआ विद्यमान है।
यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है।

द्वैतबोध मिथ्या है।
अनेकता में एकता का बोध ही सत्यबोथ है।

संसार में सत्य खोज का विषय नहीं बल्कि बोध का विषय है।
अध्ययन-अध्यापन, पठन-पाठन, चर्चा-चिंतन, विश्लेषण-दर्शन द्वारा सत्य को सहज ही जाना-समझा जा सकता है।

सत्य कठिन नहीं सदैव सरल है।
सत्य को जानने समझने के लिए केवल शुद्ध बुद्धि की आवश्यकता होती है और मनुष्य एक बुद्धिमान प्राणी है।
अतः शुद्ध बुद्धि वाले मनुष्य के लिए सत्य कभी दुर्लभ नहीं होता।
सत्य तो पहले खोजा हुआ ही है, सत्य कभी खोया हुआ नहीं है।
सत्य का ज्ञान संसार मे सर्वत्र बिखरा पड़ा है।
सृष्टि का कण-कण सत्य का उपदेशक है।

लेकिन जब मनुष्य बेईमान और दुष्ट व अपराधी हो जाता है, पंचदोषों और पंचअपराधों में लिप्त हो जाता है तो वह सत्य को प्रत्यक्ष देखता भी नहीं, देखता-सुनता हुआ भी नहीं सुनता, जानता हुआ भी नहीं जानता।
और इस महान सरल सत्य को ध्यान समाधि जप तप आदि के द्वारा निरंतर ढूढते रहने का बहाना गढ़ता है, पाखंड करता है।

✍ राम गुप्ता
(स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश