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“सेवा हि परमो धर्मः” का उदाहरण है मेडिकल काॅलेज के कार्डियोलाॅजी की सिस्टर इन चार्ज विभा सिंह

आदित्य त्रिपाठी ( प्रबन्ध सम्पादक IV24 News ) :

आदित्य त्रिपाठी

कोमल है कमजोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है ।
जग को जीवन देने वाली मौत भी तुझसे हारी है ।।

नारी शक्ति स्वरूपा एवम् दया की प्रतिमा होती है । कठिन से कठिन समय में उसने अपनी परवाह किए बिना आगे बढ़कर संकटों का डटकर सामना किया है । नारी की संकल्पशक्ति ऐसी कि एक बार यदि ठान ले तो काल को भी उसके सामने शीश झुकाना ही पड़ता है । स्त्री खुद को सम्भालने के साथ-साथ परिवार को सम्भालती है, बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कारित करती है । स्त्रियों ने समाज को सदैव कुछ न कुछ दिया ही है और आज भी दे रही हैं । घर-परिवार की अनेक जिम्मेदारियां होने के उपरान्त भी यह नारी शक्ति समाजिक जिम्मेदारियों को निभाने में पुरुषों से कभी कम नहीं रही । ऐसी ही एक नारी शक्ति का नाम हैं विभा सिंह जो मेडिकल कॉलेज लखनऊ के कार्डियोलाॅजी विभाग में मुख्य परिचारिका के पद पर कार्यरत हैं ।

सिस्टर विभा सिंह

इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी से जूझ रहा है परन्तु विभा सिंह मजबूत इरादों के साथ अपने मन में सेवा-भाव लिए संक्रमित लोगों की सेवा में बराबर लगी हुई हैं । यह कार्य करना विभा सिंह के लिए इतना सरल भी नहीं था क्यों कि विभा सिंह के दो बच्चे भी हैं जिनमें एक की उम्र 1 वर्ष तथा दूसरा 4 वर्ष का है । दो छोटे बच्चे होने के बावजूद विभा सिंह कोविड 19 से संक्रमित हुए लोगों की सेवा में रहने के साहसिक निर्णय के बारे में कहती हैं कि मैं “सेवा हि परमो धर्मः” का भाव लेकर ही इस क्षेत्र में आई थी और बस उसी का निर्वहन कर रही हूँ ।

धन्य है वह देश और समाज जहाँ विभा सिंह जैसी समर्पण की मूर्तियाँ जन्म लेती हैं ।

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